राम मंदिर का नया कमांड सेंटर ! श्रद्धालुओं से सुरक्षा तक, जीतेंद्र मिश्रा के कंधों पर होंगी ये बड़ी जिम्मेदारियां
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अयोध्या के राम मंदिर प्रबंधन में अब एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को अपना पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। यह नियुक्ति केवल एक प्रशासनिक फेरबदल नहीं, बल्कि मंदिर के कामकाज को और अधिक पेशेवर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

क्यों पड़ी CEO की जरूरत?

हाल के दिनों में मंदिर प्रशासन को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। दान की राशि में कथित हेराफेरी और चोरी की घटनाओं के बाद एक FIR दर्ज की गई थी। जांच के दौरान CCTV फुटेज में कर्मियों को कैश छिपाते हुए देखा गया, जिससे सुरक्षा और प्रबंधन की खामियां जगजाहिर हो गईं। इस विवाद के बाद ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों को इस्तीफा देना पड़ा और SIT ने कड़ी निगरानी व जवाबदेही की सिफारिश की। इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए पहली बार CEO का पद सृजित किया गया है।

कैसे चुना गया नया कमांडो ?

इस पद के लिए प्रक्रिया बेहद पारदर्शी और सख्त थी। 5,585 आवेदनों में से छंटनी के बाद 16 उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज और अनुभवी अधिकारियों की कमेटी ने अंततः जीतेंद्र मिश्रा के नाम पर मुहर लगाई। मिश्रा को उनके अनुशासित करियर और ऑपरेशन सिंदूर जैसे जटिल अभियानों को संभालने के अनुभव के आधार पर चुना गया है।

जीतेंद्र मिश्रा: एक अनुभवी चेहरा

रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा का करियर चार दशकों का रहा है। वे फाइटर पायलट रहे हैं और वेस्टर्न एयर कमांड जैसे अहम पदों को संभाल चुके हैं। उनके पास दबाव में फैसले लेने, बड़ी टीमों को लीड करने और जटिल प्रणालियों को व्यवस्थित करने का लंबा अनुभव है। उन्होंने इस नई भूमिका को केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि राम सेवा का अवसर बताया है।

अब क्या बदलेगा राम मंदिर में?

नया CEO बनने के बाद, मिश्रा मंदिर के प्रोफेशनल ऑपरेशनल हेड होंगे। उनकी मुख्य जिम्मेदारियों में शामिल हैं:

विश्वास बहाली की चुनौती

आज राम मंदिर ट्रस्ट के सामने सबसे बड़ी चुनौती न केवल कुशल प्रबंधन है, बल्कि करोड़ों राम भक्तों का भरोसा फिर से कायम करना भी है। मिश्रा की उपस्थिति से अब यह उम्मीद की जा रही है कि मंदिर का प्रबंधन अब अधिक पेशेवर, पारदर्शी और अभेद्य होगा।

मिश्रा ने अयोध्या पहुंचकर अपना पद भार ग्रहण करते हुए कहा कि वे जल्द ही अपनी कार्ययोजना साझा करेंगे। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि सेना का अनुशासन मंदिर की व्यवस्था को किस हद तक बदल पाता है।

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