पाकिस्तान क्रिकेट की बदहाली पर फूटा दानिश कनेरिया का गुस्सा, बोले- 70 साल में ऐसी दुर्दशा नहीं देखी
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नई दिल्ली: पाकिस्तान क्रिकेट टीम का प्रदर्शन इन दिनों अपने सबसे निचले स्तर पर है। इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में लगातार दो हार के बाद टीम चारों तरफ से घिरी हुई है। इस बीच, पूर्व स्पिनर दानिश कनेरिया ने टीम की जर्जर हालत के लिए क्रिकेट प्रशासन और गलत नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है।

टीम में संघर्ष की कमी कनेरिया का मानना है कि हारना खेल का हिस्सा है, लेकिन पाकिस्तानी खिलाड़ियों में जीतने की कोई जिद्द या संघर्ष करने की भावना नहीं दिख रही है। उन्होंने कहा कि उन्होंने पिछले 70 सालों में पाकिस्तान को इतना बेबस कभी नहीं देखा। टीम में हार की जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं है और बार-बार कप्तान और कोच बदलने से स्थिति और बिगड़ गई है।

गेंदबाजी और बल्लेबाजी पर सवाल पूर्व स्पिनर ने टीम की गेंदबाजी को सबसे बड़ा कमजोर पक्ष बताया। उन्होंने कहा कि इंग्लैंड की पिच पर 140-150 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाले गेंदबाजों की जरूरत होती है, जो पाकिस्तान के पास नहीं हैं। मोहम्मद अब्बास और साजिद खान जैसे खिलाड़ियों को बाहर रखने के फैसलों को उन्होंने बेतुका बताया। साथ ही, बाबर आजम और मोहम्मद रिजवान की बल्लेबाजी पर भी उन्होंने निशाना साधा और उनके खराब फॉर्म को टीम के लिए घातक बताया।

चयन प्रक्रिया पर नाराजगी तीसरे टेस्ट के लिए टीम में किए गए सात बड़े बदलावों पर कनेरिया ने चयनकर्ताओं को आड़े हाथों लिया। उन्होंने पूछा कि यदि ये खिलाड़ी इतने महत्वपूर्ण थे, तो पहले दो मैचों में इन्हें क्यों नहीं खिलाया गया? कनेरिया ने कहा कि सिर्फ दौरे के आधार पर टीम चुनने के बजाय घरेलू क्रिकेट पर ध्यान देना जरूरी है।

घरेलू ढांचे की विफलता कनेरिया ने पाकिस्तान के घरेलू क्रिकेट मॉडल के ढहने को मुख्य समस्या बताया। उन्होंने कहा कि पहले विभागीय क्रिकेट से बेहतरीन खिलाड़ी निकलते थे, लेकिन सिस्टम बदलने से प्रतिभाओं का रास्ता बंद हो गया है। उन्होंने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में घरेलू क्रिकेट को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि पाकिस्तान का टैलेंट पूल खत्म हो चुका है।

पड़ोसी देशों से सीख लेने की सलाह कनेरिया ने बांग्लादेश और श्रीलंका की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी कोचिंग व्यवस्था और युवा खिलाड़ियों पर भरोसा उन्हें मजबूत बना रहा है। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि अगर पाकिस्तान को अपनी खोई हुई साख वापस पानी है, तो उसे प्रशासन से लेकर चयन समिति तक पूरी तरह से कड़े और बड़े बदलाव करने होंगे। वरना, आने वाले समय में स्थिति इससे भी बदतर हो सकती है।

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