देशभर में आरक्षण की समीक्षा को लेकर छिड़ी बहस के बीच राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव और लालू प्रसाद यादव ने मोर्चा खोल दिया है। दोनों नेताओं ने आरक्षण खत्म करने की किसी भी कोशिश को कतई बर्दाश्त न करने की चेतावनी दी है।
लालू यादव की दो टूक: संविधान के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने कड़े शब्दों में कहा कि यह बाबा साहेब का बनाया हुआ संविधान है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, संविधान बदलने की कोशिश करने वालों की जनता आंखें निकाल लेगी। देश की जनता ऐसे किसी भी दुस्साहस को माफ नहीं करेगी।
तेजस्वी का हमला: आरक्षण का लाभ उठाने वाले उसी के विरोधी खेमे में क्यों? नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और जीतन राम मांझी पर निशाना साधा है। तेजस्वी का आरोप है कि ये नेता आरक्षण का लाभ भी उठाते हैं और उसी भाजपा-आरएसएस के साथ खड़े हैं, जो आरक्षण को समाप्त करना चाहती है।
तेजस्वी ने चुनौती दी, अगर दम है तो अपनी आरक्षित सीटों को छोड़कर सामान्य सीटों से चुनाव लड़कर दिखाएं। ये लोग मलाई भी खाएंगे और आरक्षण के खिलाफ भी बोलेंगे। उन्होंने मोहन भागवत के 2015 के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि बिहार की जनता ने पहले भी ऐसे मंसूबों को धूल चटा दी है।
तेजस्वी का अपना तर्क: मैंने कभी नहीं उठाया आरक्षण का लाभ अपने भाषण में तेजस्वी यादव ने इस बात पर जोर दिया कि उन्होंने कभी आरक्षण का फायदा नहीं उठाया। लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस दावे पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आलोचकों का तर्क है कि तेजस्वी यादव ओबीसी वर्ग से आते हैं, जहां आरक्षण का लाभ उच्च शिक्षा या सरकारी नौकरियों में मिलता है।
सवाल: लाभ उठाएं तो कैसे? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तेजस्वी यादव का यह दावा कि उन्होंने आरक्षण का लाभ नहीं लिया, अधूरा है। दरअसल, तेजस्वी की शिक्षा और करियर ग्राफ पर गौर करें तो उन्होंने न तो उच्च शिक्षा (जहां ओबीसी आरक्षण लागू होता है) पूरी की है और न ही कभी किसी सरकारी नौकरी के लिए आवेदन किया है।
इसके अलावा, भारत की चुनावी प्रणाली में लोकसभा या विधानसभा स्तर पर ओबीसी के लिए कोई सीट आरक्षित नहीं होती है। ऐसे में तेजस्वी के पास आरक्षित सीट से चुनाव लड़ने का विकल्प ही नहीं है। इसके विपरीत, चिराग पासवान और जीतन राम मांझी दलित समाज से आते हैं, जिनके लिए पंचायत से लेकर लोकसभा तक सीटें आरक्षित होती हैं।
निष्कर्ष: राजनीति या हकीकत? यह बहस अब केवल आरक्षण की समीक्षा तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह व्यक्तिगत हमलों में तब्दील हो चुकी है। एक ओर दलित नेता आरक्षण के वितरण और समीक्षा की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आरजेडी इसे संविधान पर हमले के रूप में देख रही है।
क्या तेजस्वी का यह बयान महज चुनावी बिसात है, या फिर आरक्षण पर आरजेडी का रुख वाकई सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनेगा? यह आने वाला समय ही बताएगा।
गुड़ खाये, गुलगुले से परहेज!
— Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) August 30, 2026
दो केंद्रीय मंत्री श्री जीतनराम मांझी और चिराग पासवान 𝐑𝐒𝐒 के निर्देश पर विपरीत दिशाओं में बात कर 𝐁𝐉𝐏-𝐑𝐒𝐒 के आरक्षण खत्म करने के मूल उद्देश्य से ध्यान भटका आरक्षण सर्मथक जनभावना का आंकलन करना चाहते है। जिनका खुद का स्वतंत्र वजूद नहीं होता वो… pic.twitter.com/LDaXnTWQFm
बिश्केक में ऐतिहासिक नजारा: एक ही कार में पहुंचे मोदी और पुतिन, वर्ल्ड नोमैड गेम्स का शानदार आगाज
सोने का मोह क्यों नहीं छोड़ेगा भारत? पीएम मोदी की अपील और ग्रहों का महा-टकराव
दलीप ट्रॉफी फाइनल में इतिहास रचने को तैयार 15 साल का वंडर बॉय वैभव सूर्यवंशी
बुमराह और सैमसन की धमाकेदार वापसी: अफगानिस्तान के खिलाफ टीम इंडिया का ऐलान
अकाली दल की बेचैनी और बीजेपी का नो : पंजाब में गठबंधन की राजनीति का क्या है भविष्य?
पैर गंवाने का दर्द भी नहीं रोक पाया पढ़ाई का जुनून, 400 मीटर दूर स्कूल के लिए रोज निकलती है बलिया की नन्ही रागिनी
दिल्ली बस का शर्मनाक वीडियो हुआ वायरल: भीड़ का फायदा उठा मनचले ने की महिला के साथ बदसलूकी
बेटियों की फीस के लिए नंगे पैर दौड़ी मां: 47 वर्षीय रमाबाई का संघर्ष बना मिसाल
₹36,000 करोड़ का गंगा एक्सप्रेसवे: 4 महीने में ही धंस गई सड़क, गड्ढे पर बिछा दिया कालीन
नेपाल में जलप्रलय: मलबे से निकलती लाशों का अंबार, मजबूर सरकार ने अपनाया कोरोना मॉडल