अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा अकाली दल पंजाब की राजनीति में कभी बड़े भाई की भूमिका में रहने वाला शिरोमणि अकाली दल आज अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। 2012 के बाद से सत्ता से बाहर हुई पार्टी का जनाधार लगातार गिरता गया है। 2020 में किसान आंदोलन के दौरान बीजेपी से नाता टूटने के बाद स्थिति और बिगड़ गई। आज हालात यह हैं कि पार्टी के पास महज एक सांसद और तीन विधायक बचे हैं। फरवरी 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले, अकाली दल के लिए यह करो या मरो की स्थिति है।
गठबंधन के लिए क्यों बेताब है बादल परिवार? सुखबीर सिंह बादल और उनके सहयोगी लगातार बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में हैं। हरसिमरत कौर बादल और बिक्रम सिंह मजीठिया जैसे नेताओं के बयान साफ संकेत देते हैं कि वे फिर से पुराने दौर (बीजेपी-अकाली गठबंधन) को वापस लाना चाहते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अकाली दल के लिए यह गठबंधन सिर्फ राजनीतिक विकल्प नहीं, बल्कि अपनी जमीन बचाने की आखिरी कोशिश है। अकेले चुनाव लड़कर वे अपनी खोई हुई साख को पुनर्जीवित करने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं।
बीजेपी का रुख: सभी 117 सीटों पर लड़ेंगे अकेले अकाली दल की तमाम कोशिशों के बावजूद, बीजेपी ने हर बार गठबंधन से इनकार किया है। पंजाब बीजेपी के प्रभारी सतीश पूनिया ने स्पष्ट किया है कि पार्टी राज्य की सभी 117 सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ेगी। यह संदेश राष्ट्रीय स्तर तक से दिया जा चुका है। बीजेपी का मानना है कि उसने पिछले कुछ वर्षों में पंजाब में अपना संगठन काफी मजबूत किया है और अब उसे किसी बैसाखी की जरूरत नहीं है।
पावर डायनामिक्स का बदला खेल विशेषज्ञों के अनुसार, बीजेपी अब अकाली दल के साथ पुरानी शर्तों पर नहीं लौटना चाहती। पहले अकाली दल गठबंधन में बड़ा भाई होता था, लेकिन अब बीजेपी इस समीकरण को बदलने के मूड में है। बीजेपी ने पंजाब में कांग्रेस और आप के कई बड़े दिग्गजों को अपने पाले में लाकर अपनी स्थिति बेहतर की है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर भी पेंच फंसा है, जिसे लेकर बीजेपी कोई भी समझौता करने के मूड में नजर नहीं आती।
क्या यह सिर्फ एक माइंड गेम है? कुछ जानकारों का यह भी मानना है कि बीजेपी का बार-बार मना करना एक सोची-समझी रणनीति (माइंड गेम) हो सकती है। पार्टी चाहती है कि अकाली दल दबाव में रहे, ताकि भविष्य में अगर गठबंधन की कोई गुंजाइश बने भी, तो शर्तें बीजेपी की हों। फिलहाल, बीजेपी अपनी अकेले लड़ने की रणनीति पर मजबूती से कायम है। 2027 तक यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अकाली दल बीजेपी को मनाने में कामयाब होता है, या फिर पंजाब की राजनीति में नए समीकरण जन्म लेंगे।
VIDEO | Chandigarh: I am repeating that thing again. It may seem boring to you, but the BJP will contest elections in all 117 seats on its own strength and capability, BJP s in-charge for Punjab, Satish Poonia, told reporters.
— Press Trust of India (@PTI_News) August 31, 2026
Poonia s statement came amid speculation about a… pic.twitter.com/slvkAWeseN
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