शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का 2026 शिखर सम्मेलन किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शुरू हो चुका है। 31 अगस्त और 1 सितंबर तक चलने वाले इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई प्रमुख देशों के नेता हिस्सा ले रहे हैं। यह समिट ऐसे समय में हो रही है जब SCO अपनी स्थापना के 25 साल पूरे कर रहा है।
क्या है SCO का महत्व? वर्ष 2001 में स्थापित यह संगठन आज दुनिया के सबसे बड़े क्षेत्रीय मंचों में से एक है। इसमें भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान और बेलारूस सहित 10 पूर्ण सदस्य शामिल हैं। शुरू में केवल सीमा सुरक्षा तक सीमित रहने वाला यह ग्रुप अब व्यापार, ऊर्जा, तकनीक और कनेक्टिविटी जैसे व्यापक मुद्दों पर काम कर रहा है।
सम्मेलन का मुख्य एजेंडा इस बार की समिट का मुख्य केंद्र शांति, विकास और समृद्धि है। बैठकों में आतंकवाद, कट्टरपंथ और संगठित अपराधों को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा माना गया है। इसके अलावा, सदस्य देश एशिया और यूरोप को जोड़ने के लिए नए रेल और सड़क मार्गों पर चर्चा कर रहे हैं, ताकि ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास को गति दी जा सके।
भारत के लिए यह दौरा क्यों है खास? भारत के लिए यह समिट मध्य एशिया के खनिज संपदा से भरपूर देशों—कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान—तक अपनी पहुंच बढ़ाने का बड़ा अवसर है। भारत का चाबहार बंदरगाह और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC) इसी रणनीति का हिस्सा हैं।
इसके अलावा, SCO भारत को एक ऐसा मंच देता है जहां वह चीन और पाकिस्तान के साथ बहुपक्षीय माहौल में संवाद कर सकता है। सीमा पर तनाव हो या आर्थिक संतुलन, इस मंच के जरिए भारत अपनी बात मजबूती से रख रहा है। साथ ही, रूस के साथ रक्षा और ऊर्जा संबंधों को और प्रगाढ़ करने की दिशा में भी यह बैठक अहम है।
कौन क्या हासिल करना चाहता है?
चुनौतियां और भविष्य हालांकि सदस्य देशों के अपने आंतरिक मतभेद (जैसे भारत-चीन सीमा विवाद और भारत-पाकिस्तान संबंध) एक बड़ी चुनौती हैं, लेकिन फिर भी उन्हें एक मंच पर लाना ही इस संगठन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। SCO में फैसले आम सहमति से होते हैं, इसलिए जमीन पर असर दिखने में समय लगता है।
अंततः, बिश्केक समिट की सफलता केवल घोषणाओं पर नहीं, बल्कि उनके धरातल पर क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। यदि व्यावहारिक सहयोग बढ़ा, तो यह संगठन यूरेशिया क्षेत्र में विकास और शांति की एक नई धुरी बन सकता है।
A wonderful meeting with Prime Minister of Armenia, Mr. Nikol Pashinyan on the sidelines of the SCO Summit in Bishkek.
— Narendra Modi (@narendramodi) August 31, 2026
India-Armenia cooperation is all set to grow in defence, IT, space, education, pharmaceuticals and more.
We are equally certain to deepen trade and… pic.twitter.com/y2W7ToY5GB
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