अखरोट के जंगल, बर्फीले तेंदुए और ईगल हंटिंग: किर्गिस्तान की अद्भुत दुनिया, जहां पहुंचे पीएम मोदी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का किर्गिस्तान दौरा न केवल कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मध्य एशिया के इस अनूठे देश की समृद्ध विरासत को भी दुनिया के सामने ला रहा है। बिश्केक में होने वाले SCO शिखर सम्मेलन और वर्ल्ड नोमैड गेम्स के बीच, आइए जानते हैं कि किर्गिस्तान को क्या चीज खास बनाती है।

94% पहाड़ों वाला देश: पर्वतारोहियों का स्वर्ग

किर्गिस्तान की पहचान इसके ऊंचे और दुर्गम पहाड़ों से है। देश का करीब 94 प्रतिशत हिस्सा तिआन शान (स्वर्गीय पहाड़) शृंखला से घिरा हुआ है। यहाँ सात हजार मीटर से अधिक ऊंची चोटियां जैसे विक्ट्री पीक पर्वतारोहियों और एडवेंचर प्रेमियों को आकर्षित करती है। यह इलाका किसी खुले संग्रहालय जैसा है, जहाँ हर कदम पर प्रकृति का नया रूप देखने को मिलता है।

इस्सिक-कुल: वह झील जो कभी नहीं जमती

किर्गिस्तान की सबसे बड़ी प्राकृतिक पहचान इस्सिक-कुल झील है। पहाड़ों के बीच स्थित यह विशाल झील इतनी ऊंचाई पर होने के बावजूद कभी पूरी तरह नहीं जमती। इसी कारण इसे गर्म झील कहा जाता है। यह झील न केवल पर्यटकों के लिए बोटिंग और कैंपिंग का केंद्र है, बल्कि यह इस देश की खूबसूरती का मुख्य आकर्षण भी है।

अर्सलानबोब का अखरोट वन

किर्गिस्तान केवल बर्फ का देश नहीं है, यहाँ दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक अखरोट के जंगल भी मौजूद हैं। अर्सलानबोब क्षेत्र में फैले ये जंगल न केवल पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि स्थानीय लोगों की आजीविका का मुख्य आधार भी हैं। पतझड़ के दौरान यहाँ का नज़ारा देखने लायक होता है।

यर्ट और खानाबदोश संस्कृति

किर्गिस्तान की खानाबदोश जीवनशैली का प्रतीक यर्ट है—एक पारंपरिक गोल तंबू। ऊन और लकड़ी से बने ये तंबू आसानी से कहीं भी लगाए जा सकते हैं। यह आज भी यहाँ की संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है और पर्यटकों के लिए एक अनोखा अनुभव पेश करता है।

ईगल हंटिंग और वर्ल्ड नोमैड गेम्स

किर्गिस्तान अपनी पुरानी परंपराओं को संजोकर रखने के लिए मशहूर है। ईगल हंटिंग (बाज के साथ शिकार) की कला यहाँ सदियों से जीवित है। इसी तरह, वर्ल्ड नोमैड गेम्स के जरिए देश अपनी घुड़सवारी, कुश्ती और तीरंदाजी जैसी पारंपरिक खेल संस्कृति को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करता है।

स्नो लेपर्ड का घर और दुर्लभ वन्यजीव

किर्गिस्तान के बर्फीले पहाड़ दुर्लभ स्नो लेपर्ड (बर्फीले तेंदुए) का प्राकृतिक आवास हैं। इसके अलावा, यहाँ मार्को पोलो भेड़ और आइबेक्स जैसे दुर्लभ जीव भी पाए जाते हैं। यह देश अपनी जैव विविधता की रक्षा के प्रति गंभीर है और इको-टूरिज्म की अपार संभावनाएं रखता है।

भारत के साथ शिक्षा का बढ़ता रिश्ता

पिछले कुछ वर्षों में किर्गिस्तान भारतीय छात्रों के लिए मेडिकल शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। कम खर्च और अच्छी सुविधाओं के चलते यहाँ भारतीय छात्रों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। शिक्षा के अलावा, सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध भी दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूती दे रहे हैं।

एक नजर में किर्गिस्तान:

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