लखनऊ में सनसनीखेज वारदात: कुलदीप सिंह सेंगर के करीबी रहे धीरेंद्र प्रताप सिंह की हत्या, सिर-सीने में दागी गोलियां
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लखनऊ में महाराणा प्रताप चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप सिंह की निर्मम हत्या ने पूरे राज्य में हड़कंप मचा दिया है। बीते शनिवार (29 अगस्त) को सुशांत गोल्फ सिटी से लापता हुए धीरेंद्र का शव अगले दिन नहर किनारे बरामद हुआ। उनके शरीर पर गोलियों के गहरे निशान मिले हैं।

कौन थे धीरेंद्र प्रताप सिंह?

उन्नाव के रहने वाले धीरेंद्र प्रताप सिंह का परिवार पिछले कई सालों से लखनऊ में रह रहा था। वह प्रॉपर्टी डीलिंग और ट्रांसपोर्ट के व्यवसाय से जुड़े थे। साथ ही, वे महाराणा प्रताप चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में भी सक्रिय थे। हालांकि वे खुद को भाजपा नेता बताते रहे, लेकिन उन्नाव भाजपा जिलाध्यक्ष का कहना है कि पार्टी में उनका कोई आधिकारिक पद नहीं था।

कुलदीप सिंह सेंगर से जुड़ा रहा है नाता

धीरेंद्र प्रताप सिंह का नाम उन्नाव के बहुचर्चित माखी दुष्कर्म मामले से भी जुड़ा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, वह पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के बेहद करीबी और कट्टर समर्थक थे। 2017 में दुष्कर्म पीड़िता के चाचा के खिलाफ दर्ज वसूली के मुकदमे में धीरेंद्र एक गवाह के तौर पर भी सामने आए थे, जिसके चलते उन्हें सुरक्षा के तौर पर गनर भी मिले हुए थे। गौर करने वाली बात यह है कि हत्या के दिन वह अपने गनर के साथ नहीं थे।

अपहरण और हत्या की खौफनाक कड़ी

पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, 29 अगस्त की शाम धीरेंद्र अपनी फॉर्च्यूनर कार से घर से निकले थे। इसके बाद उनका कोई अता-पता नहीं चला। पत्नी ममता सिंह ने उनके ड्राइवर पर अपहरण का संदेह जताया था। परिवार ने बताया कि ड्राइवर ने पहले झूठ बोला कि धीरेंद्र मॉल में हैं, फिर कहा कि वह उन्नाव के परिचितों के साथ गए हैं। 30 अगस्त की शाम दुबग्गा के पास नहर से उनका शव बरामद हुआ।

हत्या के पीछे का संभावित कारण: 50 करोड़ की जमीन?

जांच में जमीनी विवाद हत्या की मुख्य वजह माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्नाव में 50 करोड़ रुपये की जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। धीरेंद्र ने हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और फर्जी रजिस्ट्री की शिकायत भी दी थी। पुलिस अब इसी एंगल पर गहनता से जांच कर रही है।

पुलिस हिरासत में ड्राइवर, खुलासे का इंतज़ार

इस मामले में पुलिस ने धीरेंद्र के ड्राइवर समेत दो लोगों को हिरासत में लिया है। प्राथमिक पूछताछ में ड्राइवर के बयान संदिग्ध पाए गए हैं। पुलिस घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल के जरिए इस साजिश के अन्य आरोपियों की पहचान करने में जुटी है।

नाम का भ्रम और जीवित होने का दावा

घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी। कुछ मीडिया रिपोर्टों में मृतक को हिंदू युवा वाहिनी का पदाधिकारी बता दिया गया था। बाद में, हिंदू युवा वाहिनी के उसी नाम के एक पदाधिकारी ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर स्पष्ट किया कि वह जीवित और सुरक्षित हैं। उन्होंने मीडिया से आग्रह किया कि खबरें प्रसारित करने से पहले तथ्यों की पुष्टि जरूर करें। फिलहाल, पुलिस की फोरेंसिक टीम धीरेंद्र की बरामद फॉर्च्यूनर कार की जांच कर रही है ताकि हत्या की गुत्थी पूरी तरह सुलझाई जा सके।

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