क्या खार्ग द्वीप की तबाही ईरान को कर देगी कंगाल? ट्रंप के दावे और तेल निर्यात पर मंडराता संकट
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अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक एआई (AI) वीडियो जारी कर दावा किया है कि ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खार्ग द्वीप को तबाह कर दिया गया है। अगर यह दावा सच साबित होता है, तो ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए यह एक बड़ी तबाही साबित हो सकती है।

ईरान की आर्थिक जीवन रेखा पर प्रहार

खार्ग द्वीप फारस की खाड़ी में स्थित ईरान का सबसे महत्वपूर्ण तेल टर्मिनल है। ईरान का लगभग 90% कच्चे तेल का निर्यात इसी द्वीप से होता है। समुद्र की गहराई अधिक होने के कारण यहां बड़े तेल टैंकर आसानी से तेल लोड करते हैं। यदि यह टर्मिनल काम करना बंद कर देता है, तो ईरान का तेल निर्यात पूरी तरह ठप हो सकता है, जिससे देश में पहले से ही बेकाबू महंगाई और अधिक विकराल हो जाएगी।

अमेरिका का आर्थिक शिकंजा

ट्रंप केवल सैन्य ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी ईरान को घेरने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया है कि अब हर हफ्ते ईरान से जुड़े बैंकों और संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अमेरिका की कोशिश ईरान के वित्तीय तंत्र को डॉलर आधारित वैश्विक व्यवस्था से पूरी तरह बाहर करने की है ताकि ईरानी सरकार की कमाई के रास्तों को बंद किया जा सके।

अगर खार्ग बंद हुआ, तो ईरान के पास क्या हैं विकल्प?

यदि खार्ग द्वीप का टर्मिनल लंबे समय के लिए निष्क्रिय होता है, तो ईरान के पास केवल तीन सीमित विकल्प बचते हैं:

  1. अन्य बंदरगाहों का उपयोग: ईरान जैस्क जैसे छोटे टर्मिनलों से निर्यात बढ़ाने की कोशिश कर सकता है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर स्थित हैं। हालांकि, इनकी क्षमता खार्ग के मुकाबले बहुत कम है।
  2. होर्मुज जलडमरूमध्य का दबाव: ईरान इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही को बाधित करने की धमकी देकर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की कोशिश कर सकता है। यह कदम वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा कर सकता है।
  3. उत्पादन में कटौती: यदि तेल बाहर भेजने का रास्ता नहीं बचा, तो ईरान को मजबूरन तेल का उत्पादन घटाना होगा, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।

पहले भी रहा है निशाने पर

खार्ग द्वीप का इतिहास संघर्षों से भरा रहा है। 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान भी इस पर भारी बमबारी हुई थी। वहीं, हाल ही में 13 मार्च को अमेरिका ने पहली बार सीधे हवाई हमले में इस द्वीप पर मौजूद ईरानी मिसाइल बंकरों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। तब तेल ढांचे को बचा लिया गया था, लेकिन ट्रंप के इस ताजा दावे ने इलाके में नए सिरे से खलबली मचा दी है।

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