आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कनाडा के टोरंटो में एक कार्यक्रम के दौरान भारत के विश्वगुरु बनने के पीछे के दर्शन को स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि भारत ने कभी दुनिया पर शासन करने के लिए सेना नहीं भेजी, बल्कि अपनी संस्कृति और ज्ञान के प्रसार से अपनी पहचान बनाई है।
साम्राज्य विस्तार का नहीं, सेवा का इतिहास भागवत ने कहा कि दुनिया में अक्सर महाशक्तियों की पहचान उनके द्वारा जीते गए देशों और युद्धों से होती है। लेकिन भारत का इतिहास इससे अलग है। भारतीय सदियों पहले छोटी नावों और पैदल ही दुर्गम रास्तों से चीन, मंगोलिया और थाईलैंड तक पहुंचे। वहां उन्होंने किसी धर्म का जबरन परिवर्तन नहीं कराया, बल्कि ज्योतिष, आयुर्वेद और जीवन जीने का दर्शन साझा किया।
महाशक्ति और विश्वगुरु में अंतर भागवत के अनुसार, महाशक्ति वह है जो अपनी सैन्य और आर्थिक ताकत से दूसरों पर दबाव बनाए। वहीं, विश्वगुरु उसे माना जाता है जिसे दुनिया स्वतः ही यह स्थान दे। भारत की शक्ति हथियारों में नहीं, बल्कि वसुधैव कुटुम्बकम (पूरी पृथ्वी एक परिवार है) के विचार में निहित है। आज भी इंडोनेशिया, कंबोडिया और थाईलैंड में भारतीय संस्कृति के स्पष्ट निशान इस बात का प्रमाण हैं।
गुड महाराजा और संकट में सेवा का भाव अपने संबोधन में उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलैंड के बच्चों को शरण देने वाले नवानगर के महाराजा जाडेजा का उदाहरण दिया। उन्होंने समझाया कि संकट के समय बिना किसी स्वार्थ के मानवता की रक्षा करना ही भारतीय संस्कृति का मूल है। यही सेवा का भाव भारत को अन्य राष्ट्रों से अलग बनाता है।
क्या भविष्य में भी विश्वगुरु बना रहेगा भारत? भागवत ने स्पष्ट किया कि विश्वगुरु होना कोई ऐसा स्थायी पद नहीं जो हमेशा के लिए सुरक्षित हो जाए। यह एक जिम्मेदारी है। इसे हर पीढ़ी को अपने आचरण और सेवा से बार-बार सिद्ध करना पड़ता है। यदि आज भी भारत अपने ज्ञान, सह-अस्तित्व और विश्व कल्याण की भावना को जीवित रखता है, तभी वह इस पद पर बना रह सकता है।
हिंदू जागरण का वास्तविक अर्थ हिंदू जागेगा तो दुनिया जागेगी वाले बयान पर उन्होंने कहा कि इसका अर्थ प्रभुत्व जमाना नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी को पहचानना है। उन्होंने जोर दिया कि हिंदू दर्शन विविधता का सम्मान करता है। यदि कोई यह सोचता है कि भारत में अन्य मतों के लिए जगह नहीं है, तो वह हिंदू धर्म के मूल अर्थ को नहीं समझ रहा है। सच्चा हिंदू वह है जो सभी मार्गों को एक ही लक्ष्य की ओर ले जाने वाला मानता है।
#WATCH | Toronto, Canada | RSS Chief Mohan Bhagwat says, When I say Hindu, the word Hindu cannot be defined by any specific language, through any specific worship, or through any living style. All these are there. These are the diversities of human beings. Hindus respect and… pic.twitter.com/oIOHOrH3gZ
— ANI (@ANI) August 31, 2026
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