मोहन भागवत के बयान पर बोले देवेंद्र फड़नवीस: हिंदुओं को सहिष्णुता सिखाने की जरूरत नहीं, यह हमारे खून में है
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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयानों ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी है। न्यूयॉर्क में दिए गए एक बयान पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।

क्या है मोहन भागवत का बयान? न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित वन वर्ल्ड वन ह्यूमैनिटी कार्यक्रम में भागवत ने कहा था कि जो यह सोचता है कि भारत में मुसलमानों के लिए कोई जगह नहीं है, वह सच्चा हिंदू नहीं हो सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंदू धर्म इंसानियत की एकता में विश्वास रखता है और विविधता ही प्रकृति का नियम है।

फड़नवीस का रुख: भागवत के बयान पर टिप्पणी नहीं, लेकिन तत्व सही है इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कहा, हम मोहन जी के बयानों पर कोई टिप्पणी नहीं करते, लेकिन जिस तत्व की चर्चा हो रही है, वह बिल्कुल सही है। हिंदुत्व की आत्मा सहिष्णुता (tolerance) है।

उन्होंने कहा कि हिंदू सभ्यता दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यता है और विदेशी आक्रमणों को झेलने के बावजूद हमने अपनी सहिष्णुता नहीं खोई, बल्कि कई संस्कृतियों को खुद में समाहित कर लिया।

सहिष्णुता हिंदुओं के खून में है फड़नवीस ने आगे कहा, हिंदुओं को सहिष्णुता का पाठ पढ़ाने की आवश्यकता नहीं है; यह उनके खून में है। इसका अर्थ कमजोर होना नहीं है, बल्कि सबके साथ समभाव रखना और सभी धर्मों का सम्मान करना है।

मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि भारत ने हमेशा यहूदियों और ईरान से आए शरणार्थियों को न केवल शरण दी, बल्कि उन्हें अपनी संस्कृति का अभिन्न अंग भी बनाया।

हिंदू हमलावर नहीं, लेकिन प्रतिकार जरूरी सहिष्णुता की व्याख्या करते हुए फड़नवीस ने स्पष्ट किया कि इसका मतलब अत्याचार सहना नहीं है। उन्होंने कहा, हिंदू कभी सामने से हमला नहीं करता, वह सबको साथ लेकर चलने में विश्वास रखता है। लेकिन अगर कोई हमला करे, तो उसका प्रतिकार (विरोध) करना भी हमारा कर्तव्य है।

विरोध के बावजूद हुआ आयोजन न्यूयॉर्क में आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर काफी चर्चा थी। मेयर जोहरान ममदानी समेत कई संगठनों द्वारा विरोध किए जाने के बावजूद, संघ प्रमुख ने वैश्विक मंच से एकता और इंसानियत का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि धर्म के रास्ते अलग हो सकते हैं, लेकिन मानवता और सच्चाई का लक्ष्य एक ही है।

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