15 साल के कप्तान का मास्टरस्ट्रोक : आखिरी 3 सेकंड में DRS लेकर पलटा मैच का रुख
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दिलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल में ईस्ट जोन और सेंट्रल जोन के बीच बेंगलुरु में एक रोमांचक मुकाबला खेला गया। इस मैच में ईस्ट जोन की कप्तानी कर रहे 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने अपनी सूझबूझ से सभी को हैरान कर दिया। ईशान किशन के चोटिल होकर मैदान से बाहर जाने के बाद युवा वैभव पर कप्तानी का जिम्मा आया, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया।

मुश्किल घड़ी में दिखाया आत्मविश्वास मैच के 40वें ओवर के दौरान सेंट्रल जोन का स्कोर 99 रन पर तीन विकेट था। मुकेश कुमार की गेंद पर आर्यन जुयाल के खिलाफ फील्डरों ने कैच आउट की जोरदार अपील की, लेकिन अंपायर ने इसे नकार दिया। स्लिप में खड़े वैभव के पास फैसला लेने के लिए बहुत कम समय था। मुकेश कुमार ने उन्हें एज होने का संकेत दिया, जिस पर भरोसा जताते हुए वैभव ने रिव्यू लेने का निर्णय लिया।

घड़ी की सुइयां और सही फैसला डीआरएस कॉल के समय टाइमर तेजी से खत्म हो रहा था। वैभव ने घबराने के बजाय अंत के केवल 3 सेकंड बाकी रहते हुए रिव्यू का इशारा किया। इस दौरान उनके चेहरे पर एक हल्की मुस्कान थी, जो उनके आत्मविश्वास को बयां कर रही थी।

अल्ट्राएज ने सच किया साबित जब मामला तीसरे अंपायर के पास गया, तो तकनीक ने वैभव के फैसले को सही साबित कर दिया। अल्ट्राएज में गेंद बल्ले के किनारे से टकराते हुए साफ स्पाइक दिखा रही थी। मैदानी अंपायर को अपना फैसला बदलना पड़ा और आर्यन जुयाल को पवेलियन लौटना पड़ा। इसके बाद पूरी ईस्ट जोन की टीम खुशी से झूम उठी।

नेतृत्व क्षमता का लोहा मनवाया इस एक फैसले ने यह साबित कर दिया कि वैभव केवल एक प्रतिभाशाली बल्लेबाज नहीं, बल्कि एक चतुर रणनीतिकार भी हैं। दबाव में शांत रहकर सही निर्णय लेने की उनकी क्षमता ने चयनकर्ताओं के भरोसे को और मजबूत किया है। यह वाकया भविष्य के भारतीय क्रिकेट के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

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