उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बड़ा दांव खेला है। उन्होंने ऐलान किया है कि यदि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है, तो महज 3 महीने के भीतर जातीय जनगणना कराई जाएगी।
आबादी के हिसाब से मिलेगा हक और सम्मान अखिलेश यादव का मानना है कि सामाजिक न्याय की लड़ाई में जातीय गणना सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। सपा अध्यक्ष ने कहा कि जब तक विभिन्न जातियों की वास्तविक संख्या सामने नहीं आएगी, तब तक आबादी के अनुपात में उन्हें हक और हिस्सेदारी देना संभव नहीं है।
क्या है सपा की रणनीति? सपा मुखिया ने स्पष्ट किया है कि जातीय जनगणना से न केवल अलग-अलग वर्गों की वास्तविक आबादी का पता चलेगा, बल्कि उन्हें उचित सम्मान दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकेंगे। उन्होंने कहा कि यह पूरे देश और प्रदेश के लोगों की बहुप्रतीक्षित मांग है।
PDA राजनीति को मिली नई धार आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह बयान बेहद रणनीतिक है। अखिलेश यादव लगातार PDA (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) वर्ग को केंद्र में रखकर राजनीति कर रहे हैं। जातीय गणना का वादा करके उन्होंने सामाजिक न्याय के मुद्दे को एक बार फिर चुनाव के केंद्र में ला खड़ा किया है।
चुनावी एजेंडे का आधार अखिलेश यादव ने न केवल जातीय गणना, बल्कि प्रदेश के 26 हजार बंद स्कूलों को फिर से शुरू करने और स्वास्थ्य सेवाओं (102-108 एम्बुलेंस) की बदहाली जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया है।
स्पष्ट है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी सामाजिक न्याय और सरकारी सेवाओं के सुधार को अपना मुख्य हथियार बनाने की तैयारी में है। देखना यह होगा कि अन्य विपक्षी दल इस मांग पर क्या रुख अपनाते हैं।
पूरे देश के लोगों की ये मांग रही है कि जातीय जनगणना हो और आबादी के हिसाब से उन्हें हक और सम्मान मिले। समाजवादी सरकार बनते ही 3 महीने के अंदर गिनती कराने का काम करेंगे।
— Samajwadi Party (@samajwadiparty) August 30, 2026
- माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी pic.twitter.com/dJ1TCtqHcZ
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