बस्ती: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से एक बेहद दुखद और प्रशासनिक असंवेदनशीलता की खबर सामने आई है। लालगंज थाने में तैनात 30 वर्षीय महिला कांस्टेबल केशरी वर्मा की असमय मौत ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का आरोप है कि इलाज के लिए समय पर छुट्टी न मिलना उनकी मौत का मुख्य कारण बना।
क्या था मामला? 2018 बैच की आरक्षी केशरी वर्मा 22 अगस्त को सड़क हादसे का शिकार हो गई थीं। बाइक पर सवार केशरी के सामने अचानक कुत्ता आने से गाड़ी अनियंत्रित हो गई, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई। प्रतापगढ़ में उपचार के दौरान उनके सिर में चार टांके लगाए गए और सीटी स्कैन कराया गया था। इसके बाद वह कार्य पर लौट आईं, लेकिन चोट का दर्द बना हुआ था।
पति का सिस्टम पर सीधा वार मृतका के पति नागेंद्र वर्मा, जो उसी थाने में सिपाही हैं, ने आरोप लगाया है कि उनकी पत्नी को स्वास्थ्य कारणों से छुट्टी की सख्त जरूरत थी। उन्होंने आरोप लगाया कि छुट्टी के लिए बार-बार गुहार लगाने के बावजूद एसपी कार्यालय के कुछ कर्मचारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और अवकाश नहीं दिया। उनका साफ कहना है, अगर समय पर छुट्टी मिल जाती और सही इलाज हो पाता, तो आज मेरी पत्नी जीवित होती।
ड्यूटी के दौरान ही मौत शनिवार तड़के जब नागेंद्र अपनी ड्यूटी समाप्त कर घर लौटे, तो उन्होंने केशरी को गंभीर स्थिति में पाया। आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम हाउस पर पति का बिलखता चेहरा और न्याय की मांग प्रशासनिक व्यवस्था की बेरहमी को बयां करने के लिए काफी थी।
पोस्टमार्टम हाउस पर हंगामा और आश्वासन घटना के बाद परिवार ने बिना उचित जांच और कार्रवाई के पोस्टमार्टम कराने से मना कर दिया। परिवार का आरोप है कि पुलिस विभाग ने शुरुआती इलाज के दौरान उनकी स्थिति को नजरअंदाज किया। बाद में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मामले की निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद ही पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू हो सकी।
पुलिस का पक्ष विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सड़क हादसे के बाद शुरुआती मेडिकल रिपोर्ट में कोई बड़ी जटिलता सामने नहीं आई थी, जिसके बाद सिपाही ड्यूटी कर रही थीं। हालांकि, अब पति द्वारा लगाए गए छुट्टी न देने के आरोपों की जांच की जा रही है।
सवाल बरकरार केशरी वर्मा की मौत ने पुलिस महकमे में मानवीय संवेदनाओं और मेडिकल लीव (चिकित्सा अवकाश) को लेकर चल रही नीति पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब सभी की निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच पर टिकी हैं। क्या वाकई विभाग की लापरवाही ने एक होनहार कांस्टेबल की जान ली? इसका जवाब जांच के बाद ही मिल पाएगा।
*ये सिर्फ मौत नहीं, सिस्टम की बेरहमी है।बस्ती की महिला सिपाही केसरी वर्मा (30) हादसे में सिर फटने के बाद भी ड्यूटी पर झोंक दी गईं। 4 टांके लगे थे, दर्द सह रही थीं, इलाज के लिए छुट्टी मांगी—मिली नहीं।पति नागेंद्र वर्मा फूट-फूटकर रो रहा है: छुट्टी मिल जाती तो मेरी पत्नी आज जिंदा… pic.twitter.com/SHqwyjq0OK
— ekkadam (@ekkadam260772) August 29, 2026
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