नेपाल में जल प्रलय के बाद मंडराया महामारी का साया: 734 से ज्यादा मौतें, हजारों लापता
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नेपाल में विनाशकारी बाढ़ ने न केवल भारी जान-माल का नुकसान किया है, बल्कि अब वहां एक नई और भयावह चुनौती खड़ी हो गई है। राहत और बचाव कार्यों के दौरान अब तक 734 से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 2,498 लोग अभी भी लापता हैं।

शवों के सड़ने से महामारी का खतरा लंबे समय तक मलबे और पानी में दबे रहने के कारण अधिकांश शव बुरी तरह सड़ चुके हैं। बड़ी संख्या में शव मिलने के कारण स्थानीय मुर्दाघरों में जगह कम पड़ गई है, जिससे मजबूरन उन्हें सरकारी दफ्तरों में रखना पड़ रहा है। सड़ते हुए शवों से उठ रही दुर्गंध ने स्थानीय लोगों और प्रशासन के लिए महामारी का गंभीर खतरा पैदा कर दिया है।

किस जिले में कितने शव? आपदा का सबसे बुरा असर चितवन जिले पर पड़ा है, जहां अब तक 259 शव बरामद किए गए हैं। इसके अलावा नवलपरासी पूर्व से 184, नवलपरासी पश्चिम से 82, गोरखा से 58, नुवाकोट से 52, धादिंग से 50, तनहू से 36 और रसुवा जिले से 13 शव निकाले गए हैं। लापता लोगों में 85 सुरक्षाकर्मी और 320 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, जिनकी तलाश युद्ध स्तर पर जारी है।

डीएनए सुरक्षित कर अंतिम संस्कार की तैयारी पहचान न हो पाने के कारण शवों का अंतिम संस्कार करना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। अब सरकार ने तय किया है कि बिना पहचान वाले शवों का अंतिम संस्कार करने से पहले उनका डीएनए सैंपल सुरक्षित रखा जाएगा। गृह मंत्रालय प्रभावित जिलों के साथ मिलकर शवों के त्वरित प्रबंधन की रणनीति बना रहा है ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।

संसाधनों की कमी से जूझ रहा प्रशासन महामारी विज्ञान और रोग नियंत्रण विभाग ने चेतावनी दी है कि मौजूदा कोल्ड स्टोरेज की क्षमता बहुत कम है। बड़ी संख्या में शवों के आने से व्यवस्था चरमरा गई है। धादिंग जैसे प्रभावित इलाकों से शवों को काठमांडू और पोखरा भेजा जा रहा है ताकि वैज्ञानिक तरीके से उनका निपटान किया जा सके।

पुनर्निर्माण की बड़ी चुनौती महामारी के खतरे के बीच, नेपाल सरकार के सामने तबाही के बाद पुनर्निर्माण की भी बड़ी समस्या है। जल प्रलय ने बुनियादी ढांचे को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है, जिसके पुनर्निर्माण में अरबों डॉलर का खर्च आने का अनुमान है। फिलहाल, बालेन सरकार का पूरा ध्यान बचाव कार्यों और स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।

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