नेपाल में जल प्रलय: 734 मौतें, 4000 लापता और अब अरबों डॉलर के पुनर्निर्माण की चुनौती
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नेपाल और तिब्बत सीमा पर आए विनाशकारी जल प्रलय और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक 734 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 4,000 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। इसमें 287 भारतीयों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि लगभग 400 भारतीय अभी भी तिब्बत के दुर्गम इलाकों में फंसे हुए हैं।

मलबे और कीचड़ में दबी जिंदगियां प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति बेहद गंभीर है। कई फीट गहरे कीचड़ और मलबे के कारण बचाव कार्य में बड़ी बाधा आ रही है। राहत कर्मियों का मानना है कि मलबे की परतों के नीचे हजारों की संख्या में शव दबे हो सकते हैं। पहाड़ी रास्तों के टूटने और पुलों के बह जाने से राहत दल कई इलाकों तक पहुँचने में संघर्ष कर रहे हैं। खराब मौसम ने भी रेस्क्यू ऑपरेशन की रफ्तार को धीमा कर दिया है।

पुनर्निर्माण के लिए अरबों डॉलर की दरकार नेपाल सरकार के सामने अब जान बचाने के साथ ही अर्थव्यवस्था को संभालने की दोहरी चुनौती है। विदेश मंत्री शिशिर खनल के अनुसार, तबाही का दायरा इतना बड़ा है कि देश के बुनियादी ढांचे, सड़कों और आवासों के पुनर्निर्माण में अरबों डॉलर का खर्च आएगा। नेपाल सरकार नुकसान का विस्तृत आकलन कर रही है और इस विशाल कार्य के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की अपील करने की तैयारी में है।

जारी है रेस्क्यू का महाअभियान नेपाल में फंसे लोगों को निकालने के लिए 1.80 लाख से ज्यादा बचावकर्मी और लगभग 40 हेलीकॉप्टर दिन-रात काम कर रहे हैं। अब तक 4,451 लोगों की जान बचाई जा चुकी है, जिनमें 187 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। गृहमंत्री सुदन गुरंग खुद जमीनी स्तर पर मोर्चा संभाले हुए हैं और बचाव दलों का मार्गदर्शन कर रहे हैं।

नुवाकोट में तबाही का मंजर ड्रोन और सैटेलाइट तस्वीरों से सामने आया है कि नुवाकोट जैसे जिले पूरी तरह मलबे में तब्दील हो चुके हैं। गांव, घर और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स का नामोनिशान मिट चुका है। फिलहाल, मौसम में थोड़ा सुधार होते ही लापता लोगों की तलाश के अभियान को और तेज कर दिया गया है। देश के सामने अब अपने नागरिकों को सुरक्षित ठिकाने देने और तबाह हुए बुनियादी ढांचे को फिर से खड़ा करने की कठिन चुनौती है।

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