चित्रकूट में जल प्रलय: 23 साल का रिकॉर्ड तोड़ उफनी मंदाकिनी, बाढ़ में डूबे रामघाट और मंदिर
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उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में मूसलाधार बारिश ने तबाही मचा दी है। मंदाकिनी नदी ने विकराल रूप धारण कर लिया है, जिससे रामघाट और आसपास के कई इलाके जलमग्न हो गए हैं। पानी का स्तर पिछले 23 वर्षों के रिकॉर्ड को पार कर गया है।

रेकॉर्ड तोड़ जलस्तर से हाहाकार जिलाधिकारी पुलकित गर्ग के अनुसार, मंदाकिनी नदी का जलस्तर 2003 के पिछले सभी रिकॉर्डों को पीछे छोड़ चुका है। नदी खतरे के निशान से कई मीटर ऊपर बह रही है। इस अप्रत्याशित बाढ़ ने रामघाट के धार्मिक स्थलों, मठों और सैकड़ों दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया है।

सड़कें बनीं दरिया, संपर्क टूटा नदी का पानी सड़कों और पुलों पर बह रहा है। रामघाट से हनुमानधारा जाने वाला मार्ग और चित्रकूट-सतना मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया है। झांसी-मिर्जापुर मार्ग पर भी जलभराव के चलते यातायात ठप है। सड़कों के डूब जाने के कारण कई इलाकों का संपर्क मुख्य शहर से कट गया है, जहां लोगों को निकालने के लिए नावों का सहारा लिया जा रहा है।

गांवों तक फैला पानी, रेस्क्यू ऑपरेशन तेज बाढ़ का कहर केवल घाटों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि तरौंहा, गोबरिया और बहादुर जैसे गांवों में भी पानी घुस गया है। स्थानीय लोग अपनी जान बचाने के लिए छतों और सुरक्षित ठिकानों पर शरण लेने को मजबूर हैं। प्रशासन और SDRF की टीमें युद्धस्तर पर रेस्क्यू कार्य में जुटी हैं।

हेलीकॉप्टर से एयरलिफ्ट, NDRF तैनात गंभीर स्थिति को देखते हुए NDRF, SDRF और PAC की टीमें तैनात की गई हैं। कई इलाकों में फंसे लोगों को निकालने के लिए हेलीकॉप्टर की मदद भी ली गई है। खराब मौसम और कम दृश्यता के बावजूद बचाव दल लगातार लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। जहां हेलीकॉप्टर नहीं पहुंच पा रहे, वहां नावों के जरिए सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री योगी की सीधी नजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चित्रकूट की स्थिति पर संज्ञान लिया है। उन्होंने अधिकारियों को हर संभव मदद सुनिश्चित करने और प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने के कड़े निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने लोगों से जलभराव वाले क्षेत्रों और घाटों की ओर न जाने की अपील की है। फिलहाल स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है और अगले कुछ घंटों तक सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

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