डीएनए से तैयार होंगे भारत के स्पोर्ट्स सुपरपावर : क्या वैज्ञानिक और जमीनी हकीकत का तालमेल बैठा पाएगा देश?
News Image

नई दिल्ली: खेल की दुनिया में जीत का मतलब अब केवल पसीना बहाना नहीं, बल्कि विज्ञान का सही इस्तेमाल भी है। मेजर ध्यानचंद के जमाने में लगन ही सब कुछ थी, लेकिन 2026 में भारत अब खिलाड़ियों की जेनेटिक मैपिंग (DNA Sequencing) के जरिए उन्हें भविष्य के ओलंपिक चैंपियन के रूप में तैयार करने की ओर बढ़ रहा है।

क्या है स्पोर्ट्स जीनोमिक्स प्रोग्राम? गुजरात सरकार ने भारत के खेल इतिहास में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए स्पोर्ट्स जीनोमिक्स प्रोग्राम की शुरुआत की है। इस योजना के तहत अगले पांच वर्षों में 10 हजार खिलाड़ियों के DNA की जांच की जाएगी। इसके लिए 26 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि किसी खिलाड़ी का शरीर किस खेल के लिए सबसे उपयुक्त है।

DNA से कैसे बनेंगे चैंपियन? वैज्ञानिक दृष्टिकोण से हमारे शरीर के जीन हमारे प्रदर्शन को निर्धारित करते हैं। उदाहरण के तौर पर:

चीन और उज्बेकिस्तान की सफलता भारत के लिए यह तकनीक नई हो सकती है, लेकिन चीन ने बीजिंग 2022 विंटर ओलंपिक से पहले अपने एथलीट्स का जीनोम सीक्वेंसिंग किया था। परिणाम चौंकाने वाले थे—चीन ने 2014 के मुकाबले 2022 में पदकों की संख्या में भारी उछाल दर्ज किया। उज्बेकिस्तान भी स्कूली स्तर पर इसी तरह के प्रयोगों से खेल प्रतिभाओं को निखार रहा है। भारत के पास 26 करोड़ स्कूली बच्चे हैं, यदि उनमें से सही टैलेंट की पहचान केवल DNA के जरिए हो जाए, तो भारत विश्व खेल मानचित्र पर एक महाशक्ति बन सकता है।

जमीनी विरोधाभास: विज्ञान एक तरफ, मैदान दूसरी तरफ एक तरफ सरकार DNA टेस्टिंग जैसे वैज्ञानिक प्रयोग कर रही है, तो दूसरी तरफ खिलाड़ियों के लिए सबसे जरूरी बुनियादी ढांचा यानी प्लेग्राउंड छीने जा रहे हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण मुंबई का नेविल डिसूजा फुटबॉल ग्राउंड है, जिसे BMC एक प्रदर्शनी केंद्र बनाने की योजना बना रही है।

स्वप्न और यथार्थ का संघर्ष नेविल डिसूजा ग्राउंड, जिसने भारतीय फुटबॉल को राहुल भेके जैसे कई बड़े नाम दिए हैं, आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। मुंबई के खिलाड़ी पहले ही कूपरेज ग्राउंड खो चुके हैं। यदि सरकार खेल को इंडस्ट्री के रूप में देख रही है और 2030 तक इसके 10 लाख करोड़ रुपये के बाजार बनने की उम्मीद कर रही है, तो सवाल यह उठता है कि खिलाड़ी अभ्यास कहां करेंगे?

सिस्टम को यह समझना होगा कि DNA रिपोर्ट तो एक रोडमैप दे सकती है, लेकिन पदक पसीने और मैदान पर ही जीते जाते हैं। यदि भारत को वाकई स्पोर्ट्स सुपरपावर बनना है, तो वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ-साथ जमीनी स्तर पर खेल के मैदानों को बचाना और उन्हें सुरक्षित करना भी उतना ही अनिवार्य है।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

ग्रेटर नोएडा में मासूम से दरिंदगी: हत्यारे का 24 घंटे में एनकाउंटर, CCTV फुटेज से खुला खौफनाक सच

Story 1

चित्रकूट में जल प्रलय: 23 साल का रिकॉर्ड तोड़ उफनी मंदाकिनी, बाढ़ में डूबे रामघाट और मंदिर

Story 1

मेट्रो में यूं साधारण अंदाज में दिखे पूर्व दिग्गज तेज गेंदबाज, सादगी देख फैंस ने कहा- रियल लेजेंड

Story 1

जाको राखे साइयां मार सके ना कोय: नेपाल में 72 घंटे मलबे में दबी रही 6 साल की मासूम, चमत्कारिक बचाव

Story 1

लंदन की नौकरी छोड़कर बनीं IAS, जानिए कौन हैं दिव्या मित्तल और अचानक क्यों दिया इस्तीफा?

Story 1

मेट्रो में दिखा भारतीय क्रिकेट का गेंदबाजी उस्ताद , सादगी देख फैंस ने ठोका सलाम

Story 1

हुबली में दिनदहाड़े खौफनाक कत्लेआम: कुल्हाड़ी से काटकर युवक की निर्मम हत्या, वीडियो वायरल

Story 1

अगर कोई सोचता है कि भारत में नहीं होने चाहिए मुसलमान, तो वह हिंदू नहीं : मोहन भागवत

Story 1

क्या पांड्या ब्रदर्स फिर हुए एक? वायरल तस्वीर का सच आया सामने

Story 1

नेपाल में जल-प्रलय का खौफनाक सच: टूरिस्ट के कैमरे में कैद हुई ग्लेशियर फटने की वह घटना