राहुल गांधी से उपवास तुड़वाना चाहते थे सोनम वांगचुक, आंदोलन की अंदरूनी कलह का किया पर्दाफाश
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NEET पेपर लीक के विरोध में हुए आंदोलन और अपनी लंबी भूख हड़ताल को लेकर सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने नए खुलासे किए हैं। एक पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने आंदोलन खत्म करने की अपनी योजना और इसमें शामिल रहे अभिजीत दीपके, सौरव दास व आशुतोष रांका की भूमिका पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं।

राहुल गांधी के नाम थी वांगचुक की योजना

सोनम वांगचुक ने बताया कि उनकी योजना आंदोलन को सम्मानजनक तरीके से समाप्त करने की थी। वे 20 जुलाई को संसद तक मार्च निकालना चाहते थे और विपक्ष को यह मुद्दा सौंपना चाहते थे। वांगचुक ने स्पष्ट कहा, मेरी इच्छा थी कि मैं संसद तक जाऊं और राहुल गांधी जी के हाथों अपना अनशन खत्म करूं।

उम्मीदों और हकीकत का अंतर

आंदोलन के दौरान मार्च में भीड़ जुटाने को लेकर भी अलग-अलग दावे किए गए थे। आशुतोष रांका ने 10 हजार और सौरव दास ने 15 हजार लोगों के शामिल होने का अनुमान लगाया था, जबकि वांगचुक को उम्मीद थी कि एक-दो लाख लोग जुटेंगे। हालांकि, उन्हें अपनी योजना के अनुसार आगे बढ़ने का मौका नहीं मिला और जल्द ही उन्हें आंदोलन से किनारे कर दिया गया।

ये संत नहीं हैं , सहयोगियों पर वांगचुक का तंज

वांगचुक ने अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा, इन लोगों में राजनीतिक महत्वाकांक्षा जरूर है। ये कोई ऐसे संत नहीं हैं जिनमें निजी स्वार्थ न हो। भविष्य में इनमें से कौन क्या करेगा, इसकी गारंटी नहीं दी जा सकती। वांगचुक ने संकेत दिए कि जंतर-मंतर का मंच कई लोगों के लिए एक राजनीतिक लॉन्चपैड जैसा था।

नेतृत्व पर खड़ा हुआ सवाल

जब छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस की कार्रवाई हो रही थी, तब नेतृत्व को लेकर भी सवाल उठे। वांगचुक ने बताया कि उस समय सौरव दास और आशुतोष रांका सरकारी बैठकों में व्यस्त थे, जबकि अभिजीत दीपके दूसरे प्रतिनिधिमंडल में थे। वांगचुक की इन टिप्पणियों ने अब यह बहस छेड़ दी है कि क्या आंदोलन का मूल उद्देश्य कहीं पीछे छूट गया था और व्यक्तिगत एजेंडे हावी हो गए थे।

सलमान खान और आमिर खान पर कही यह बात

भूख हड़ताल के दौरान सलमान खान के It s done bro वाले संदेश पर वांगचुक ने कहा कि वे हर किसी की परिस्थितियों का सम्मान करते हैं। वहीं, आमिर खान के साथ मुलाकात को लेकर उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि शायद उस समय फिल्म की शूटिंग के दौरान आमिर अपने किरदार में इतने खोए थे कि उन्हें मुलाकात याद नहीं रही।

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