समय रैना का शो फिर विवादों में: बिहारी और कश्मीरी पंडितों पर टिप्पणी से मचा सियासी बवाल
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नई दिल्ली: कॉमेडियन समय रैना का शो इंडियाज गॉट लेटेंट एक बार फिर विवादों के घेरे में है। हालिया एपिसोड में समय रैना और कॉमेडियन शेरोन वर्मा के बीच हुई तीखी नोक-झोंक ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। शो के दौरान दोनों ने अपने-अपने राज्यों को लेकर जो टिप्पणियां कीं, उसे लेकर अब देशभर में बहस छिड़ गई है।

क्या हुआ शो के दौरान?

एपिसोड में समय रैना ने शेरोन वर्मा के बिहारी होने पर तंज कसते हुए कई विवादित बातें कहीं। बदले में शेरोन ने समय की कश्मीरी पृष्ठभूमि पर निशाना साधते हुए कहा, कम से कम मैंने अपनी मर्जी से अपना राज्य छोड़ा। शेरोन का यह जवाब सीधे तौर पर कश्मीरी पंडितों के विस्थापन से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसे सोशल मीडिया पर कई लोगों ने माइक-ड्रॉप मोमेंट बताया, तो कई ने इसे बेहद असंवेदनशील करार दिया।

सियासी हमलों का दौर

शिवसेना (UBT) नेता आनंद दुबे ने समय रैना को निशाने पर लेते हुए उन्हें विवादित व्यक्ति करार दिया। उन्होंने कहा, ये लोग पैसे कमाने के लिए किसी भी हद तक गिर सकते हैं। कॉमेडी के नाम पर अश्लीलता फैलाना और धर्म या राज्यों का अपमान करना गलत है। वहीं, बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि किसी भी नागरिक के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मिला-जुला रुख

शिवसेना (शिंदे गुट) के संजय निरुपम ने इस मामले पर संतुलित राय रखी। उन्होंने कहा, हास्य को हास्य के तौर पर ही लेना चाहिए, लेकिन कश्मीरी पंडितों के दर्द पर टिप्पणी और उस पर तालियां बजना सही नहीं है। समाज में अश्लीलता के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

कश्मीरी पंडित समुदाय की कड़ी प्रतिक्रिया

जम्मू-कश्मीर पीस फोरम ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि वे सेंसरशिप के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन संवेदनशीलता की वकालत करते हैं। फोरम ने कहा, कश्मीरी पंडितों का विस्थापन मनोरंजन का साधन नहीं है। हमारे दुख और हमारी मातृभूमि को महज पब्लिसिटी पाने या कॉमेडी के लिए पंचलाइन नहीं बनाया जा सकता।

कॉमेडी की लक्ष्मण रेखा क्या है?

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कॉमेडी की सीमा क्या है? क्या अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर ऐतिहासिक दुखों और संवेदनशील समुदायों का मजाक उड़ाना सही है? कॉमेडियन अक्सर अपने अनुभवों को मंच पर रखते हैं, लेकिन जब वह अनुभव किसी पूरे समुदाय के जख्मों को कुरेदने लगे, तब समाज का आक्रोशित होना लाजिमी है। फिलहाल, इस मामले पर समय रैना की ओर से कोई आधिकारिक सफाई नहीं आई है।

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