नेपाल में तबाही: फंसे हैं तो घबराएं नहीं, मदद के लिए जारी हुए 24/7 हेल्पलाइन नंबर
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नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। बाढ़ और भूस्खलन के कारण अब तक 675 लोगों की मौत की खबर है, जबकि सड़कें और पुल बह जाने से कई इलाकों का संपर्क पूरी तरह टूट चुका है। संकट की इस घड़ी में भारत नेपाल के लिए देवदूत बनकर उभरा है।

108 भारतीय सुरक्षित, लापता लोगों की तलाश जारी

विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेपाल में फंसे 108 भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, और करीब 50 लोगों से दोबारा संपर्क स्थापित हो गया है। हालांकि, अभी भी 275 से अधिक भारतीय और 128 भारतीय मूल के लोग लापता बताए जा रहे हैं। वहीं, चीन में फंसे 900 भारतीय सुरक्षित हैं और भारतीय दूतावास लगातार उनके संपर्क में है।

भारतीय दूतावास की हेल्पलाइन सक्रिय

नेपाल में फंसे भारतीयों और उनके परिजनों की मदद के लिए काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने 24/7 हेल्पलाइन शुरू की है। किसी भी आपात स्थिति में आप इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:

भारत की महा-मदद : 68.5 टन राहत सामग्री और विशेष टीमें

भारत ने अब तक वायुसेना के विमानों के जरिए 68.5 टन राहत सामग्री पहुंचाई है, जिसमें दवाएं, खाना, कंबल, पोर्टेबल जनरेटर और हाइजीन किट शामिल हैं। चौथी उड़ान में टनल रेस्क्यू के लिए तकनीकी विशेषज्ञ और अत्याधुनिक उपकरण भेजे गए हैं।

DNA जांच के लिए 6 फोरेंसिक टीमें तैनात

मृतकों की पहचान करना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। भारत ने 19 विशेषज्ञों की 6 फोरेंसिक टीमें नेपाल भेजने का निर्णय लिया है। ये टीमें DNA विश्लेषण के जरिए शवों की पहचान करने में नेपाली अधिकारियों की मदद करेंगी, ताकि परिजनों को उनके अपनों के बारे में जानकारी मिल सके।

कनेक्टिविटी बहाली: 230 फीट का स्टील ब्रिज

टूटे हुए रास्तों को जोड़ने के लिए भारत ने बड़े स्तर पर तैयारी की है। 230 फीट लंबे सिंगल-लेन मॉड्यूलर स्टील ब्रिज के पुर्जे लेकर ट्रक पहुंच चुके हैं। इसके अलावा 7 और बेली ब्रिज लगाने की योजना है, जिसके लिए तकनीकी टीमें नेपाल में तैनात की जा रही हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर लगातार नेपाल के शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में हैं। भारत ने स्पष्ट किया है कि नेपाल के साथ अपने विशेष संबंधों के चलते, जरूरत पड़ने पर और अधिक मानवीय सहायता भेजी जाएगी।

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