ड्रैगन का खेल खत्म: अर्जेंटीना के सफेद सोने पर भारत का कब्जा, लैटिन अमेरिका में नई आर्थिक क्रांति
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नई दिल्ली: भारत और अर्जेंटीना के बीच हाल ही में संपन्न हुई संयुक्त व्यापार समिति (JTC) की चौथी बैठक ने वैश्विक भू-राजनीति और अर्थव्यवस्था में एक बड़ा बदलाव ला दिया है। ब्यूनस आयर्स में हुई इस उच्चस्तरीय चर्चा के बाद भारत ने लैटिन अमेरिका में अपनी धमक बढ़ाते हुए चीन के दबदबे को सीधी चुनौती दी है।

अर्जेंटीना के सफेद सोने पर भारत की मुहर

भारत की सरकारी कंपनी खनिज विदेश इंडिया लिमिटेड (KABIL) ने अर्जेंटीना के कैटामार्का प्रांत में लिथियम खनन का दूसरा चरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। लिथियम, जिसे आज के दौर का सफेद सोना कहा जा रहा है, भारत की इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) क्रांति के लिए ऑक्सीजन के समान है। इस प्रोजेक्ट की सफलता से न केवल भारत की विदेशी निर्भरता खत्म होगी, बल्कि देश में बैटरी उत्पादन की लागत भी काफी कम हो जाएगी।

भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए खुले दरवाजे

अर्जेंटीना ने अपने औषधि नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए भारत को एनेक्स-2 से हटाकर एनेक्स-1 श्रेणी में शामिल किया है। इसका सीधा अर्थ है कि अब भारतीय दवा कंपनियां अर्जेंटीना में बिना किसी जटिल रेगुलेटरी बाधा के अपना कारोबार कर सकेंगी। इससे वहां के नागरिकों को सस्ती भारतीय जेनरिक दवाएं मिलेंगी और भारत के फार्मा सेक्टर को एक नया वैश्विक बाजार हासिल होगा।

किसानों की बढ़ेगी आय, 6.5 अरब डॉलर का व्यापार

भारत और अर्जेंटीना का द्विपक्षीय व्यापार 6.5 अरब डॉलर के ऐतिहासिक स्तर को पार कर चुका है। दोनों देशों के बीच व्यापार में 17 फीसदी की सालाना वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे भारत अर्जेंटीना का पांचवां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है। अब प्याज, आलू, दूध और दालों जैसे कृषि उत्पादों के निर्यात से भारतीय किसानों और निर्यातकों के लिए आय के नए रास्ते खुल गए हैं।

टेक और स्पेस में भी भारत का मास्टरस्ट्रोक

यह साझेदारी केवल खदानों और दवाओं तक सीमित नहीं है। भारत और अर्जेंटीना अब एविएशन, स्पेस टेक्नोलॉजी और 5G नेटवर्क जैसे हाई-टेक क्षेत्रों में भी मिलकर काम करेंगे। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में भारत की विशेषज्ञता अर्जेंटीना के आधुनिकीकरण में मददगार साबित होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीतिक गठजोड़ न केवल ग्लोबल सप्लाई चेन को सुरक्षित करेगा, बल्कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

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