रक्षाबंधन पर मौत से जंग: उफनती नदी पार करने को मजबूर हुई गर्भवती महिला
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गड़चिरोली: एक तरफ देश रक्षाबंधन के पर्व पर बहनों की सुरक्षा के वादे कर रहा था, वहीं गड़चिरोली जिले के एटापल्ली तहसील स्थित कोईदूल गांव में एक गर्भवती महिला को अपनी जान बचाने के लिए उफनती नदी के आगे झुकना पड़ा। पुल और सड़क न होने के कारण यहाँ की व्यवस्था फिर एक बार शर्मसार हुई है।

क्या हुआ उस दिन? शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे 26 वर्षीय छाया सुरेश नैताम को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। बरसात के कारण नदी उफान पर थी और गांव का संपर्क मुख्य मार्ग से पूरी तरह कट चुका था। एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी, जिसके चलते महिला को अस्पताल पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बन गया।

जान जोखिम में डाल पार की नदी स्थित की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाई। छाया नैताम को स्ट्रेचर पर लिटाया गया और ग्रामीणों ने खुद पानी के तेज बहाव के बीच से गुजरकर उन्हें नदी पार कराया। इस दौरान स्वास्थ्य सेविका भी उनके साथ मौजूद थी। नदी पार करने के बाद उन्हें कसनसूर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां से गंभीर हालत के चलते उन्हें आगे रेफर कर दिया गया।

दो महीने में दूसरी बार यही मंजर यह कोई इकलौती घटना नहीं है। इससे पहले 20 जुलाई 2026 को भी पुष्पा सुनील परसा नामक महिला को इसी तरह सड़क के अभाव में स्ट्रेचर पर ढोकर एंबुलेंस तक ले जाया गया था। बार-बार हो रही इन घटनाओं से साफ है कि प्रशासन के दावों के बावजूद धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।

प्रशासन पर भड़के ग्रामीण ग्रामीणों में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि पिछली घटना के बावजूद क्षेत्र में न सड़क बनी और न ही पुल का निर्माण हुआ। ग्रामीण सवाल पूछ रहे हैं कि क्या उन्हें अपनी जान जोखिम में डालकर ही इलाज के लिए जाना होगा?

क्या कहता है स्वास्थ्य विभाग? पूरे मामले पर जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रताप शिंदे ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि भौगोलिक चुनौतियों और बाढ़ के बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने तत्परता दिखाई है। महिला की स्थिति को स्थिर बनाए रखने के लिए हर संभव चिकित्सकीय कदम उठाए गए हैं।

हालांकि, स्वास्थ्य विभाग का दावा अपनी जगह है, लेकिन सवाल तो व्यवस्था का है जो आज भी आजादी के इतने सालों बाद ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाओं के लिए मौत के मुंह में धकेलने पर मजबूर कर रही है।

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