बारामती का आसमान: 7 साल में 10 विमान हादसे, क्या सुरक्षा मानकों से हो रहा है समझौता?
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पुणे जिले का बारामती एयरफील्ड इन दिनों चर्चा का केंद्र है। यह चर्चा किसी हवाई विकास की नहीं, बल्कि लगातार हो रही विमान दुर्घटनाओं की है। 9 अगस्त 2026 को एक प्रशिक्षण विमान के रनवे से बाहर जाने की घटना ने एक बार फिर बारामती के आसमान की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या हमारा एयरफील्ड बढ़ते विमान संचालन और सुरक्षा चुनौतियों के लिए तैयार है?

अजित पवार हादसे का गहरा घाव

28 जनवरी 2026 को बारामती ने एक ऐसी त्रासदी देखी, जिसने पूरे राज्य को झकझोर दिया। VSR Ventures का Learjet 45 विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें महाराष्ट्र के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत पांच लोगों की मौत हो गई। इस हादसे ने एयरफील्ड की बुनियादी ढांचे, जैसे एयर ट्रैफिक कोऑर्डिनेशन, नेविगेशनल एड्स और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली की पोल खोल दी। हालांकि जांच रिपोर्ट आना अभी बाकी है, लेकिन इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था का सच सबके सामने ला दिया है।

2019-2026: सुरक्षा में चूक का सिलसिला

बारामती में 2019 से लेकर 9 अगस्त 2026 तक कम से कम 10 गंभीर विमानन घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें से अधिकांश घटनाएं प्रशिक्षण उड़ानों से जुड़ी हैं। 13 मई 2026 को रेडबर्ड एकेडमी का विमान और 9 अगस्त 2026 को कार्वर एविएशन का विमान तकनीकी खराबी का शिकार हुआ। यह आंकड़े महज इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित विफलता की ओर इशारा करते हैं।

अक्टूबर 2023: खतरे की घंटी

अक्टूबर 2023 में महज तीन दिनों के भीतर दो प्रशिक्षण विमानों का दुर्घटनाग्रस्त होना एक बड़ी चेतावनी थी। इन घटनाओं ने प्रशिक्षण संस्थानों की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया:

अनकंट्रोल्ड एयरफील्ड की चुनौतियां

बारामती एक अनकंट्रोल्ड एयरफील्ड के रूप में संचालित होता है, जहाँ पारंपरिक एटीसी (ATC) टावर का अभाव है। जब एक ही रनवे से प्रशिक्षण विमान, निजी जेट और चार्टर्ड फ्लाइट्स गुजरती हैं, तो ट्रैफिक प्रबंधन में जटिलता बढ़ जाती है। जानकारों का मानना है कि यहां की मौजूदा व्यवस्था आज के बढ़ते हवाई यातायात के लिए नाकाफी साबित हो रही है।

ऑडिट है समय की मांग

केवल जांच के आदेश देना समाधान नहीं है। सरकार और DGCA को अब एक व्यापक इंडिपेंडेंट एविएशन सेफ्टी ऑडिट करने की आवश्यकता है। इन प्रमुख बिंदुओं पर स्पष्टता जरूरी है:

  1. रनवे और तकनीकी बुनियादी ढांचे की स्थिति क्या है?
  2. प्रशिक्षण संस्थानों के प्रशिक्षकों और मशीनों की जवाबदेही कैसे सुनिश्चित हो?
  3. दुर्घटनाओं की जांच रिपोर्ट सार्वजानिक कर उनमें सुधार क्यों नहीं लागू किए जा रहे?

अगला हादसा टालने की जिम्मेदारी

बारामती में पायलटों का सुरक्षित बच जाना किसी बड़ी उपलब्धि का प्रमाण नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। विमान हादसे के बाद का बचाव सुरक्षा का विकल्प नहीं हो सकता। बारामती के आसमान को सुरक्षित बनाने के लिए अब हमें अगले हादसे के इंतजार के बजाय, सुरक्षा मानकों के सख्त क्रियान्वयन और पूरी एविएशन इकोसिस्टम की समीक्षा की जरूरत है। क्या प्रशासन तब तक इंतज़ार करेगा, जब तक कोई और बड़ी त्रासदी न हो जाए?

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