98% मांगें मानीं, फिर भी क्यों नहीं थमा रांची का छात्र आंदोलन? CBI जांच पर फंसा है बड़ा पेंच
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झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी छात्रों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। 25 जुलाई से रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में शुरू हुआ यह प्रदर्शन अब एक बड़े विधानसभा घेराव की ओर बढ़ रहा है। सरकार के दावों और छात्रों की जिद के बीच स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

छठे दौर की वार्ता विफल रविवार को सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच छठे दौर की बातचीत हुई। उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने दावा किया कि सरकार ने छात्रों की 98% मांगें मान ली हैं, जिसमें 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द करना भी शामिल है। इसके बावजूद छात्र पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। छात्रों की मुख्य मांग अब CBI जांच पर आकर टिक गई है, जिसे मानने से सरकार ने फिलहाल इंकार कर दिया है।

क्यों CBI जांच पर अड़े हैं छात्र? सरकार का तर्क है कि JSSC-CGL परीक्षा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में आयोजित हुई थी, इसलिए इसकी CBI जांच संभव नहीं है। इसके विकल्प के तौर पर सरकार ने दोषियों के खिलाफ 90 दिनों में चार्जशीट दाखिल करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने और विशेषज्ञों की एक समिति (IIT-ISM, IIM और XLRI से) गठित करने का प्रस्ताव दिया है। लेकिन छात्र नेता रवींद्र पासवान का कहना है कि जब तक CBI जांच की मांग पूरी नहीं होती, कोई समझौता नहीं होगा।

JPSC के तीन सदस्यों का इस्तीफा आंदोलन के दबाव में JPSC के तीन सदस्य—अनिमा हंसदा, अजिता भट्टाचार्य और जमाल अहमद—इस्तीफा दे चुके हैं, जिसे राज्यपाल ने स्वीकार भी कर लिया है। इन सदस्यों को कथित अनियमितताओं के मामले में CID ने पूछताछ के लिए तलब किया है। छात्रों का मानना है कि यह उनके संघर्ष की पहली बड़ी जीत है, लेकिन यह उनके आंदोलन को समाप्त करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

आज विधानसभा घेराव की तैयारी छात्रों ने आज सोमवार को विधानसभा घेराव का ऐलान किया है। JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच के आह्वान पर बड़ी संख्या में छात्र बसों, ट्रेनों और अन्य वाहनों से रांची पहुंच रहे हैं। छात्रों ने सोशल मीडिया पर संदेश जारी करते हुए कहा है कि वे अपने हक के लिए आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।

प्रशासन की बढ़ी चिंता छात्रों के बढ़ते आक्रोश और रांची की ओर बढ़ते जनसैलाब को देखते हुए प्रशासन अलर्ट पर है। छात्रों को रांची पहुंचने से रोकने के लिए रास्तों में बसों और अन्य वाहनों की जांच की जा रही है। सरकार लगातार आंदोलनकारी छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो (जो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं) और उनके साथियों को मनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है।

अब सबकी निगाहें आज होने वाले विधानसभा मार्च पर टिकी हैं। क्या सरकार आखिरी समय में कोई नया फॉर्मूला पेश करेगी, या टकराव और बढ़ेगा? यह देखना बाकी है।

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