JSSC पेपर लीक का वो सच, जिसे दूसरी SIT ने दबाया: 150 में से 120 सवाल हुए थे लीक
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रांची में सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ छात्रों का आंदोलन 16वें दिन में प्रवेश कर चुका है। इस बीच, एक बड़ा खुलासा हुआ है जिसने परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सितंबर 2024 में हुई JSSC परीक्षा में व्यापक स्तर पर पेपर लीक होने के पुख्ता सबूत सामने आए हैं।

CID रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा जांच एजेंसी CID की पहली रिपोर्ट में यह स्पष्ट रूप से दर्ज था कि परीक्षा का पेपर लीक हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार, 150 में से 120 सवाल पहले ही लीक कर दिए गए थे। यह रैकेट इतना संगठित था कि नेपाल, हजारीबाग, पटना, जमशेदपुर और पश्चिम बंगाल जैसे विभिन्न केंद्रों से वॉट्सऐप और लैंडलाइन फोन के जरिए उम्मीदवारों तक उत्तर पहुंचाए गए थे।

पहली रिपोर्ट को क्यों किया गया दरकिनार? CID की शुरुआती जांच में पेपर लीक के ठोस सबूत मिले थे, जिनमें वॉट्सऐप चैट्स भी शामिल थीं। हालांकि, सरकार ने जल्द ही एक दूसरी SIT का गठन किया। इस दूसरी टीम ने पहली रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज करते हुए परीक्षा को क्लीन चिट दे दी, जिससे पूरा मामला ठंडे बस्ते में चला गया। मार्च 2025 में जब यह जांच प्रक्रिया पूरी हुई, तो सरकार ने पहली रिपोर्ट की अनदेखी कर दी।

कोर्ट पहुंचे छात्र, सरकार पर ‘डबल गेम’ का आरोप न्याय की उम्मीद में रिशु, जीत कुमार और निवास यादव नामक तीन छात्रों ने रांची हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इन छात्रों के पास SIT की वह पहली रिपोर्ट मौजूद है, जिसे सार्वजनिक नहीं किया गया था। छात्रों का आरोप है कि सरकार इस पूरे मामले में डबल गेम खेल रही है। जेपीएससी (JPSC) में सामने आए नए विवादों के बाद अब यह गुस्सा और बढ़ गया है, जो देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में एक बड़े आंदोलन में तब्दील हो चुका है।

सरकार का क्या है रुख? छात्रों के बढ़ते दबाव के बीच झारखंड की मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि छात्रों की चिंताएं जायज हैं और सरकार समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री को पूरी स्थिति से अवगत करा दिया गया है और जल्द ही किसी नतीजे पर पहुंचने की उम्मीद है।

क्या निकलेगा समाधान? फिलहाल, जयपाल मुंडा स्टेडियम में छात्रों का प्रदर्शन जारी है। छात्रों की मुख्य मांग CBI जांच और परीक्षाओं को रद्द कर फिर से आयोजित करने की है। क्या सरकार छात्रों के सुझावों को मानकर दोबारा निष्पक्ष जांच कराएगी या फिर पहली SIT रिपोर्ट की तरह इस बार भी आंदोलन को अनदेखा किया जाएगा, यह देखना बाकी है। 10 अगस्त को छात्रों ने अपनी ताकत दिखाने के लिए बड़े प्रदर्शन का आह्वान किया है।

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