राहुल गांधी का E20 वाला वीडियो हुआ वायरल: क्या अपनी ही पोल खोल बैठे कांग्रेस नेता?
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी पिछले कुछ दिनों से केंद्र सरकार की E20 (20% इथेनॉल-मिश्रित) पेट्रोल नीति को लेकर हमलावर हैं। 7 अगस्त 2026 को जारी किए गए उनके 53 सेकेंड के वीडियो ने सोशल मीडिया पर सियासी घमासान मचा दिया है। राहुल ने दावा किया था कि यह ईंधन इंजनों को नुकसान पहुंचा रहा है, लेकिन अब खुद उनका वीडियो ही चर्चा का विषय बन गया है।

दाल में काला या खुद के जाल में फंस गए राहुल? अपने वीडियो में राहुल गांधी ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा था, दाल में कुछ काला है, मगर यहां तो पूरी दाल ही काली है। लेकिन, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर प्रतिभा ठाकुर ने राहुल के इस दांव की हवा निकाल दी। प्रतिभा ने वीडियो का विश्लेषण करते हुए दिखाया कि जिस कार का फ्यूल कैप खोलकर राहुल E20 नीति का विरोध कर रहे थे, उसी गाड़ी पर Up to Petrol E20 का स्टिकर साफ नजर आ रहा है।

प्रतिभा ठाकुर की नसीहत: वीडियो डिलीट करें प्रतिभा ठाकुर ने राहुल गांधी पर सीधा कटाक्ष करते हुए कहा, राहुल जी, आप तो अपने ही चक्रव्यूह में फंस गए। विरोध करने से पहले कम से कम कार तो देख लेते। उन्होंने राहुल को सलाह दी कि वे अपना यह वीडियो जल्द से जल्द डिलीट कर दें। 1.1 मिलियन से ज्यादा बार देखे गए इस वीडियो पर प्रतिभा ने सवाल उठाया कि बिना हकीकत जाने जनता के सामने गलत तथ्य पेश करना कितना उचित है।

बीजेपी का पलटवार: विरोध का दोहरा मापदंड राहुल गांधी के वीडियो के बाद बीजेपी ने भी मोर्चा खोल दिया है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि राहुल एक तरफ E20 ईंधन के विरोध का ढोंग कर रहे हैं और दूसरी तरफ खुद उसी नीति के अनुकूल (E20-कम्पैटिबल) गाड़ी का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसे पार्टी ने दोहरा मापदंड करार दिया है।

सरकार का सफाई: इथेनॉल से होगा फायदा इस पूरे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और हरदीप सिंह पुरी ने E20 नीति का बचाव करते हुए कहा कि इससे न केवल प्रदूषण कम हो रहा है, बल्कि भारत की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता भी कम हो रही है। सरकार का तर्क है कि इससे किसानों की आय बढ़ाने में सीधी मदद मिल रही है।

क्या है असली विवाद? जहां राहुल गांधी उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ और इंजन की कार्यक्षमता को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं आलोचकों का कहना है कि राहुल ने बिना पूरी जानकारी के केवल राजनीति के लिए एक तकनीकी मुद्दे को गलत तरीके से पेश किया है। अब देखना यह होगा कि क्या राहुल गांधी इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे या यह विवाद आने वाले दिनों में और तूल पकड़ेगा।

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