झारखंड छात्र आंदोलन: रांची गेस्ट हाउस में सरकार और छात्रों के बीच अहम बातचीत शुरू
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झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ पिछले दो हफ्तों से जारी युवा आक्रोश अब निर्णायक मोड़ पर है। हेमंत सोरेन सरकार ने आंदोलनरत छात्रों से बातचीत के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं। रांची के सरकारी गेस्ट हाउस में सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच मंथन का दौर शुरू हो चुका है।

चार सदस्यीय मंत्रियों का पैनल कर रहा प्रतिनिधित्व

सरकार ने गतिरोध समाप्त करने के लिए एक विशेष पैनल गठित किया है। इसमें जेएमएम के चमरा लिंडा और सुदिव्य कुमार सोनू, कांग्रेस की दीपिका पांडेय सिंह, और आरजेडी के संजय प्रसाद यादव शामिल हैं। बैठक में राज्य प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, एडीएम और एसडीओ भी मौजूद हैं, जो हर प्रशासनिक और कानूनी पहलू पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।

सुरक्षा घेरे में पहुंचे 10 छात्र प्रतिनिधि

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्रों की 10 सदस्यीय कोर टीम जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से कड़ी सुरक्षा के बीच सरकारी गेस्ट हाउस पहुंची। इस टीम में रवीन्द्र पासवान, पीयूष कुमार, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, अंकित राज, कार्तिक सोरेन, शालू कुमारी, रवींद्र कुमार रवि, आनंद कुमार और अंकित कुमार शामिल हैं। ये प्रतिनिधि हजारों छात्रों की उम्मीदों के साथ अपनी मांगों को मजबूती से रखने के लिए तैयार हैं।

परीक्षाओं को रद्द करने की जिद पर अड़े छात्र

बातचीत की मेज पर बैठने से पहले ही छात्रों ने कड़ा रुख अपनाया हुआ है। आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का स्पष्ट कहना है कि किसी भी प्रकार के आधे-अधूरे आश्वासन से वे संतुष्ट नहीं होंगे। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:

कानूनी पेच और सरकार की चुनौती

सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती परीक्षाओं को रद्द करने से जुड़े कानूनी दांव-पेच हैं। सरकारी अधिकारी फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं ताकि ऐसा निर्णय लिया जा सके जो छात्रों के हितों को पूरा करे और भविष्य की प्रशासनिक जटिलताओं से भी बचा सके। बैठक का मुख्य उद्देश्य एक मध्यम मार्ग तलाशना है।

पूरे राज्य की नजरें बैठक के नतीजों पर

पिछले 14 दिनों से सड़कों पर अपनी मांगों को लेकर डटे छात्रों के लिए आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। रांची से लेकर पूरे राज्य के परीक्षार्थी इस बैठक के नतीजों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। क्या सरकार छात्रों की सभी शर्तें मानकर परीक्षाएं रद्द करेगी, या यह बातचीत किसी और दिशा में मुड़ेगी? यह तो बैठक के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा, लेकिन इतना तय है कि यह संवाद झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य की दशा-दिशा तय करेगा।

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