अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से रिटायरमेंट के बाद अजिंक्य रहाणे का बड़ा बयान: पछतावा नहीं, सब कुछ दिया
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भारतीय क्रिकेट के संकटमोचक कहे जाने वाले अनुभवी बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास के अपने फैसले पर चुप्पी तोड़ी है। रहाणे ने स्पष्ट किया है कि वे अपने करियर के सफर से पूरी तरह संतुष्ट हैं और उन्हें इस फैसले पर कोई मलाल नहीं है।

खुद से किए थे कई सवाल संन्यास लेने से पहले रहाणे ने करीब एक महीने तक आत्ममंथन किया। उन्होंने खुद से सवाल किया कि क्या करियर में कुछ अधूरा रह गया, लेकिन हर बार उन्हें यही जवाब मिला कि उन्होंने मैदान पर अपने खेल के लिए 200 फीसदी योगदान दिया है। रहाणे ने कहा, मैं पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहता। मैंने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की और अब शांति के साथ आगे बढ़ रहा हूं।

कोचिंग और मेंटरशिप पर नजर 14 साल के लंबे करियर को अलविदा कहने के बाद अब रहाणे का लक्ष्य नई भूमिकाएं निभाना है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि वे आने वाले समय में कोच या मेंटर की भूमिका में नजर आ सकते हैं। रहाणे का मानना है कि उन्होंने अपने करियर में हर तरह की परिस्थितियों का सामना किया है, जिससे वे युवा खिलाड़ियों की मानसिकता को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। वे अपने अनुभव को दुनिया भर की लीगों में युवा खिलाड़ियों के साथ साझा करना चाहते हैं।

ऐतिहासिक कप्तानी का सफर रहाणे का अंतरराष्ट्रीय करियर उपलब्धियों से भरा रहा है। उन्होंने भारत के लिए 85 टेस्ट मैचों में 5077 रन बनाए, जिसमें 12 शतक शामिल हैं। हालांकि, भारतीय क्रिकेट इतिहास में उन्हें विशेष रूप से 2020-21 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के लिए याद किया जाएगा। उनकी कप्तानी में भारत ने मेलबर्न में जीत दर्ज की और गाबा में ऑस्ट्रेलिया के अभेद किले को ध्वस्त कर ऐतिहासिक सीरीज जीती थी।

विदेशी लीग में नई पारी संन्यास के तुरंत बाद रहाणे एक नई चुनौती के लिए तैयार हैं। वे आगामी यूरोपियन टी20 प्रीमियर लीग (ETPL) में एम्स्टर्डम फ्लेम्स के लिए खेलते नजर आएंगे। यह रहाणे का पहला विदेशी टी20 असाइनमेंट होगा, जहां वे अपने अनुभव का जलवा बिखेरेंगे। एम्स्टर्डम फ्लेम्स ने हाल ही में उन्हें मार्की खिलाड़ी के रूप में टीम में शामिल करने की आधिकारिक घोषणा की है।

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