उत्तर प्रदेश में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का गोरखपुर विश्वविद्यालय में दिया गया बयान अब प्रदेश की राजनीति में नया उबाल लेकर आया है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला है।
अखिलेश का सीधा निशाना अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तंज कसते हुए कहा कि गोरखपुर मॉडल की पोल खुलते ही गुजरात मॉडल की घपलेबाजी भी सामने आ गई है। उन्होंने सीधे तौर पर भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि दोनों ही जगह भाजपा की सरकार है और दोनों ही जगह महा-भ्रष्टाचार व्याप्त है।
अखिलेश ने भाजपा के डबल इंजन के दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे ट्रबल इंजन करार दिया है। उन्होंने कहा कि आपसी टकराहट के कारण राज्य की व्यवस्था चरमरा गई है।
राज्यपाल ने क्यों लगाई फटकार? दरअसल, दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के 45वें दीक्षांत समारोह के दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे और सुविधाओं पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह मुख्यमंत्री का गृह क्षेत्र है, यदि यहां व्यवस्थाएं लचर हैं, तो बाकी प्रदेश का क्या हाल होगा।
राज्यपाल ने बॉयज हॉस्टल में मेस की सुविधा न होने पर नाराजगी जताई। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा, गर्ल्स हॉस्टल में मेस चल रही है, तो लड़कों के लिए क्यों नहीं? क्या उन्हें टिफिन का खाना पसंद है या बाहर का खाना बेहतर है?
खाद्य सुरक्षा और शासन पर सवाल कैंपस में परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता पर भी राज्यपाल ने गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कुकिंग ऑयल की क्वालिटी पर संदेह जताते हुए सैंपल की टेस्टिंग का आदेश दिया है।
इस दौरान उन्होंने गुजरात का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां अक्सर सैंपल बदले जाने की घटनाएं होती थीं। उन्होंने कहा कि मैं यह केवल राज्यपाल के नाते नहीं, बल्कि एक मां के तौर पर कह रही हूं कि हमारे बच्चों को पौष्टिक भोजन मिलना चाहिए।
सीएम का घर और राजनीतिक अहमियत राज्यपाल का यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गढ़ है। वे लंबे समय तक यहां से सांसद रहे हैं और यह गोरखनाथ पीठ का भी केंद्र है।
अखिलेश यादव के इस हमले ने आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली पर जनता के बीच बहस छेड़ दी है। अब देखना यह है कि प्रशासन राज्यपाल द्वारा दिए गए तीन महीने के अल्टीमेटम और विपक्ष के इन तीखे सवालों का क्या जवाब देता है।
*‘गोरखपुर मॉडल’ की पोल खोलते-खोलते तुलना के रूप में ‘गुजरात मॉडल’ की घपलेबाज़ी की बात भी सामने आ गई। दोनों में जो बातें कॉमन हैं वो ये हैं कि दोनों जगह भाजपाई सरकार है और भाजपाई महा-भ्रष्टाचार भी।
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) August 7, 2026
आपसी टकराहट ने तो ‘डबल इंजन’ को ‘ट्रबल इंजन’ बना दिया है। pic.twitter.com/QuLve7YDcP
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