केंद्र सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते दुरुपयोग पर लगाम लगाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के नियमों को बेहद सख्त कर दिया है। डीपफेक, फर्जी ऑडियो-वीडियो और आपत्तिजनक सिंथेटिक कंटेंट से निपटने के लिए आईटी नियमों में बड़े बदलाव किए गए हैं।
सरकार ने किसी भी गैर-कानूनी कंटेंट को हटाने की समय-सीमा को 36 घंटे से घटाकर अब मात्र 3 घंटे कर दिया है। यह समय-सीमा सरकार या न्यायालय से वैध नोटिस मिलने के बाद लागू होगी। इसके अलावा, नग्नता या किसी का रूप धरने (इम्पर्सोनेशन) जैसी संवेदनशील शिकायतों का समाधान अब 24 घंटे के बजाय सिर्फ 2 घंटे के भीतर करना अनिवार्य होगा।
नए नियमों के अनुसार, प्लेटफॉर्म्स को अब AI से तैयार किए गए कंटेंट पर स्पष्ट रूप से लेबल लगाना होगा। साथ ही, इसमें ट्रेसेबल मेटाडेटा होना जरूरी है, ताकि यूजर्स समझ सकें कि यह कंटेंट सिंथेटिक है। प्लेटफॉर्म्स को यूजर्स को यह भी बताना होगा कि गैर-कानूनी AI कंटेंट बनाना या शेयर करना कानूनी रूप से दंडनीय अपराध है।
यदि कोई प्लेटफॉर्म इन नए नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसे आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत मिलने वाली सेफ-हार्बर सुरक्षा गंवानी पड़ सकती है। यह सुरक्षा प्लेटफॉर्म्स को थर्ड-पार्टी कंटेंट के लिए कानूनी जवाबदेही से बचाती है। नियमों का उल्लंघन करने पर प्लेटफॉर्म्स को सीधे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
50 लाख से अधिक यूजर्स वाले बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए ऑटोमेटेड डिटेक्शन टूल्स का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया है। इन प्लेटफॉर्म्स को कंप्लायंस रिपोर्ट प्रकाशित करनी होगी, शिकायत अधिकारी नियुक्त करने होंगे और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करना होगा।
सरकार ने डीपफेक का पता लगाने के लिए देसी तकनीकों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया है। इसमें IIT जोधपुर और मद्रास द्वारा विकसित साक्ष्य फ्रेमवर्क, ऑडियो-विजुअल जालसाजी पकड़ने के लिए AI विश्लेषक और IIT खड़गपुर का रियल-टाइम वॉयस डिटेक्शन सिस्टम शामिल हैं। ये कदम एक सुरक्षित और जवाबदेह साइबरस्पेस बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास हैं।
*IT Rules have mandated AI Content Labelling. Timeline for the removal of unlawful content has been reduced from 36 hours to 3 hours: Ministry of Electronics & IT pic.twitter.com/DppuC9oo1v
— ANI (@ANI) August 6, 2026
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