यूसुफ पठान का बड़ा दांव: NDA बैठकों से दूरी के बीच सुवेंदु अधिकारी से की ये खास मांग
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में बहरामपुर से लोकसभा सांसद यूसुफ पठान इन दिनों सुर्खियों में हैं। एनडीए की बैठकों से लगातार दूरी बनाकर उन्होंने राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया था, लेकिन अब उन्होंने एक ऐसा मुद्दा उठाया है जो सीधे तौर पर 27 से 32 लाख लोगों के भविष्य से जुड़ा है।

क्या है पूरा मामला? यूसुफ पठान ने वोटर लिस्ट से नाम कटने और ट्रिब्यूनल कोर्ट में उलझे लाखों लोगों की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की है। सांसद ने पहले एक आधिकारिक पत्र लिखा और फिर दिल्ली में मुख्यमंत्री से मिलकर इस गंभीर विषय पर चर्चा की।

सांसद का कहना है कि वोटर सत्यापन की मौजूदा प्रक्रिया में बुजुर्गों, महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

यूसुफ पठान की तीन प्रमुख मांगें मुलाकात के दौरान पठान ने तीन ठोस सुझाव रखे हैं, जिनका उद्देश्य लाखों लोगों की परेशानी दूर करना है:

  1. स्पेशल ट्रिब्यूनल कोर्ट: हर जिले में विशेष ट्रिब्यूनल कोर्ट बनाई जाए ताकि लोगों को सुनवाई के लिए दूर न जाना पड़े।
  2. सरल प्रक्रिया: वोटर सत्यापन की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, आसान और समयबद्ध बनाया जाए।
  3. हेल्प डेस्क: हर ट्रिब्यूनल में हेल्प डेस्क की स्थापना हो, जिससे आम लोगों को कानूनी कागजी कार्रवाई समझने में मदद मिले।

मुख्यमंत्री ने दिया सकारात्मक आश्वासन मुलाकात के बाद यूसुफ पठान ने बताया कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने उनकी मांगों को गंभीरता से सुना है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि सरकार इस मामले पर सकारात्मक रुख अपनाएगी और यह सुनिश्चित करेगी कि किसी भी नागरिक के साथ अन्याय न हो। प्रक्रिया को पूरी तरह कानूनी दायरे में रखते हुए आसान बनाने का भरोसा दिया गया है।

NDA से दूरी और सियासी गलियारों में चर्चा यूसुफ पठान का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे हाल ही में एनडीए संसदीय दल की दो महत्वपूर्ण बैठकों में शामिल नहीं हुए थे। उनके साथ अबू ताहिर खान और खलीलुर रहमान भी अनुपस्थित रहे, जिससे राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े हुए।

हालांकि, इन सांसदों का सीएम के साथ लंच में शामिल होना यह संकेत देता है कि राजनीतिक बातचीत के रास्ते अभी बंद नहीं हुए हैं। फिलहाल, सभी की निगाहें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के पास लंबित उस फैसले पर टिकी हैं, जो एनसीपीआई के 20 सांसदों की मान्यता पर होना है। यूसुफ पठान का यह कदम उनके राजनीतिक भविष्य और क्षेत्र में उनकी छवि के लिए एक मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है।

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