डिजिटल इंडिया के दौर में यूपीआई (UPI) पेमेंट करने वाले करोड़ों लोगों के लिए एक बड़ी खबर है। केंद्र सरकार ने संसद में भुगतान और निपटान प्रणाली (संशोधन) विधेयक, 2027 पेश किया है, जिसके तहत भविष्य में 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा गया है।
क्या आम जनता पर पड़ेगा असर? सरकार और विशेषज्ञों का कहना है कि इस नियम का असर आम ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा। यह चार्ज मुख्य रूप से बड़े व्यापारियों और व्यावसायिक संस्थानों पर लागू होगा। दूध, सब्जी, किराना और ऑटो-टैक्सी जैसे रोजमर्रा के छोटे और मध्यम स्तर के भुगतान पहले की तरह ही सुरक्षित और शुल्क-मुक्त बने रहेंगे।
किसे देना होगा ये चार्ज? यह प्रस्तावित शुल्क केवल उन व्यापारियों और बड़े कमर्शियल संस्थानों पर लागू होगा जो 2000 रुपये से अधिक का पेमेंट स्वीकार करते हैं। कंज्यूमर-टू-कंज्यूमर (P2P) ट्रांजैक्शन यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए गए भुगतान पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगेगा। रिपोर्ट के अनुसार, कुल यूपीआई ट्रांजैक्शन का केवल 5 फीसदी हिस्सा ही 2000 रुपये से अधिक का होता है, इसलिए अधिकांश उपयोगकर्ता इस दायरे से बाहर रहेंगे।
कितना लग सकता है शुल्क? प्रस्ताव के अनुसार, 2000 रुपये से ऊपर के व्यावसायिक लेन-देन पर 0.25% से 0.4% तक का शुल्क तय किया जा सकता है। फिलहाल 25-30 बेसिस पॉइंट्स के शुल्क पर भी विचार चल रहा है। हालांकि, इस नियम के लागू होने की अंतिम तारीख पर अभी कोई औपचारिक निर्णय नहीं लिया गया है।
MDR शुल्क क्या है? MDR वह फीस है जो व्यापारी डिजिटल भुगतान की सुविधा देने के लिए बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को देते हैं। वर्ष 2020 में डिजिटल भुगतान को तेजी से बढ़ावा देने के लिए सरकार ने इसे यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड लेनदेन पर पूरी तरह रोक दिया था, जिसे अब विधेयक के जरिए वापस लाने की चर्चा है।
विपक्ष ने साधा निशाना सरकार के इस प्रस्तावित कदम पर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार महंगाई से जूझ रही जनता की जेब काटने की योजना बना रही है। वहीं, सरकार का तर्क है कि डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने के लिए इस तरह के संशोधनों की आवश्यकता है।
🚨 The government has proposed allowing merchant charges on select UPI payments. If approved, transactions above ₹2,000 to large businesses may attract MDR, while consumers are likely to remain unaffected. pic.twitter.com/rYjfMYZmCq
— Indian Tech & Infra (@IndianTechGuide) August 4, 2026
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