ये वो बांग्लादेश नहीं, जिसके लिए दी गई लाखों शहादत , फफक कर रो पड़ीं शेख हसीना
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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश से निष्कासन के बाद पहली बार मीडिया के सामने आकर अपनी चुप्पी तोड़ी है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में हसीना काफी भावुक नजर आईं। उन्होंने अपने दिवंगत परिवार के सदस्यों को याद करते हुए कहा कि आज वे सिर्फ एक पूर्व प्रधानमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्रपिता की बेटी के तौर पर बात कर रही हैं।

साजिश के तहत हिंसक बनाया गया छात्र आंदोलन शेख हसीना ने स्पष्ट किया कि 2024 में हुआ आंदोलन कोई शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शन नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ संगठित समूहों ने छात्रों की मांगों को सत्ता परिवर्तन के लिए एक हिंसक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। हसीना के अनुसार, उनकी सरकार ने शुरुआत से ही धैर्य और बातचीत के जरिए मुद्दों को सुलझाने की कोशिश की थी, लेकिन एक सोची-समझी साजिश के तहत इसे हिंसा में बदल दिया गया।

कानून-व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल हसीना ने सवाल खड़ा किया कि जब पुलिस स्टेशनों को आग के हवाले किया जा रहा हो और सरकारी इमारतों को निशाना बनाया जा रहा हो, तो कानून लागू करने वाली एजेंसियों की क्या जिम्मेदारी बनती है? उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों को केवल सत्ता चाहिए थी, सच्चाई से उनका कोई सरोकार नहीं था।

हजारों नेताओं का उत्पीड़न और हत्या पूर्व पीएम ने बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि आज बांग्लादेश में डर का माहौल है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके दल आवामी लीग के कार्यकर्ताओं को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है। हसीना के मुताबिक, पिछले कुछ समय में उनके दल के कम से कम 10 हजार कार्यकर्ता या तो मारे गए हैं या लापता हैं, जबकि एक लाख से अधिक लोग उत्पीड़न का शिकार हुए हैं।

मैं देश से दूर हूँ, पर लोगों से नहीं अपने खिलाफ दर्ज 600 से अधिक मुकदमों और देश से बाहर रहने की मजबूरी पर बात करते हुए उन्होंने कहा, मैंने अपनी पूरी जिंदगी बांग्लादेश के लोगों के साथ बिताई है। मुझे देश छोड़ने पर मजबूर किया गया, लेकिन मैं कभी भी अपने लोगों से अलग नहीं हुई।

उन्होंने अंत में बेहद दर्द भरे लहजे में कहा कि यह वह बांग्लादेश नहीं है जिसे उन्होंने बनाया था, और न ही यह वह देश है जिसके लिए 1971 में 30 लाख लोगों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। आज वहां जबरन वसूली और हत्याएं आम बात हो गई हैं।

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