शिक्षा और समाज सेवा के स्तम्भ डॉ. डीवाई पाटिल का निधन, देश ने खोया एक महान समाजसेवी
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नई दिल्ली: दिग्गज शिक्षाविद, समाजसेवी और बिहार, त्रिपुरा एवं पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल डॉ. डीवाई पाटिल का निधन हो गया है। उनके निधन से पूरे देश में शोक की लहर है। डॉ. पाटिल न केवल एक राजनेता थे, बल्कि उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक विशाल साम्राज्य की नींव रखी थी।

पीएम मोदी ने किया याद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. पाटिल के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पीएम मोदी ने लिखा, डॉ. पाटिल परोपकार और शिक्षा के माध्यम से समाज सेवा में हमेशा आगे रहे। उन्होंने गरीबों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। पीएम ने उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की हैं।

राष्ट्र निर्माण में अमिट योगदान केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डॉ. पाटिल के निधन को राष्ट्र के लिए बड़ी क्षति बताया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रति उनका समर्पण और राष्ट्र निर्माण में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। उनकी अटूट प्रतिबद्धता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।

कृषि मंत्री और पीयूष गोयल ने दी श्रद्धांजलि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी डॉ. पाटिल को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में उनका योगदान अविस्मरणीय है। वहीं, केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने डॉ. पाटिल के सफर को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि एक साधारण कार्यकर्ता से संवैधानिक पदों तक का उनका सफर करोड़ों लोगों के लिए मिसाल है।

शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ी विरासत डॉ. डीवाई पाटिल केवल राजनीति तक ही सीमित नहीं थे। उन्होंने डीवाई पाटिल ग्रुप की स्थापना की, जिसने देशभर में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके द्वारा स्थापित शिक्षण संस्थान आज भी हजारों युवाओं के भविष्य को संवार रहे हैं।

डॉ. पाटिल का जाना भारतीय शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र के लिए एक अपूर्णीय क्षति है। उनके द्वारा किए गए कार्य और परोपकारी दृष्टिकोण उन्हें हमेशा लोगों की यादों में जीवित रखेंगे।

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