पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ी हलचल मची है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी उथल-पुथल के बीच, नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपनी प्राथमिक सदस्यता से तुरंत प्रभाव से किनारा कर लिया है।
अचानक उठाया गया कदम चंद्र कुमार बोस ने शीर्ष नेतृत्व को भेजे अपने इस्तीफे में इसे निजी कारणों से लिया गया फैसला बताया है। हालांकि, चुनाव परिणामों के बाद पार्टी छोड़ने वाले नेताओं के क्रम में बोस का नाम जुड़ना ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। टीएमसी की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
उतार-चढ़ाव भरा सियासी सफर बता दें कि चंद्र कुमार बोस का राजनीतिक सफर काफी अस्थिर रहा है। 2026 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले वे भाजपा छोड़कर टीएमसी में शामिल हुए थे। उस समय उन्होंने भाजपा में रहने को अपनी गलती बताया था और ममता बनर्जी की विचारधारा का समर्थन किया था। अब महज कुछ ही समय बाद उनका टीएमसी से अलग होना कई सवाल खड़े कर रहा है।
नेताजी का परिवार और बंगाल की राजनीति नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परिवार से जुड़ाव के कारण चंद्र कुमार बोस का अपना एक विशेष कद और सम्मान है। जब वे टीएमसी में आए थे, तब उन्होंने राज्य में समावेशी राजनीति का वादा किया था। लेकिन अब उनके अलग होने से यह स्पष्ट है कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।
संगठन के लिए बढ़ती मुश्किलें विधानसभा चुनावों में अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद से ही टीएमसी के कई वरिष्ठ नेता और विधायक पार्टी छोड़ चुके हैं। संगठन पहले से ही आंतरिक कलह से जूझ रहा है। ऐसे में एक प्रभावशाली चेहरे का साथ छोड़ना ममता बनर्जी के लिए आगामी समय में बड़ी चुनौती पेश करेगा। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या बोस किसी अन्य दल का रुख करेंगे या राजनीति से दूरी बना लेंगे।
@MamataOfficial pic.twitter.com/sqNWsx9Wd0
— Chandra Kumar Bose (@Chandrakbose) August 3, 2026
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