बांकीपुर में लड्डू धरे रह गए, प्रशांत किशोर की आंधी में उखड़ा भाजपा का 20 साल पुराना किला
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पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर चल रही उपचुनाव की मतगणना ने बिहार की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया है। सुबह तक जिस भाजपा खेमे में जीत के जश्न की तैयारी थी और कार्यकर्ता ढेरों लड्डू बनवा रहे थे, वहां अब सन्नाटा पसर गया है। जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर जीत की दहलीज पर खड़े हैं।

भाजपा के गढ़ में खेला नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई इस सीट को भाजपा अपना अभेद्य किला मानती थी। 2006 से 2026 तक इस सीट पर भाजपा का कब्जा रहा है। हालांकि, इस बार महज 34.30 प्रतिशत कम वोटिंग ने भाजपा के लिए खतरे की घंटी बजा दी थी। भाजपा के कार्यकर्ता संभवत: अति-आत्मविश्वास में रहे, जिसका खामियाजा अब उन्हें हार के रूप में भुगतना पड़ रहा है।

नीरज सिन्हा बनाम प्रशांत किशोर भाजपा ने इस सीट पर नीरज कुमार सिन्हा को उतारा, जो प्रशांत किशोर के कद के सामने काफी कमजोर साबित हुए। प्रशांत किशोर ने 2025 की असफलताओं से सबक लेते हुए खुद मैदान में उतरने का साहसी फैसला लिया। उन्होंने चुनाव को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ एक रेफरेंडम करार दिया और भाजपा के अहंकार पर सीधा प्रहार किया।

जातिगत समीकरण और मुस्लिम वोटरों का रुख प्रशांत किशोर की बढ़त के पीछे एक बड़ा कारण भाजपा और आरजेडी दोनों के वोट बैंक में सेंधमारी है। कायस्थ समुदाय के अलावा, अन्य सवर्ण और ओबीसी वर्गों का एक बड़ा हिस्सा पीके की ओर झुक गया। सबसे चौंकाने वाला बदलाव मुस्लिम वोटरों का रहा, जिन्होंने भाजपा को हराने की क्षमता देखते हुए आरजेडी का साथ छोड़ प्रशांत किशोर को समर्थन दिया।

मुद्दों की राजनीति का असर भाजपा के पारंपरिक नेताओं ने जहां इमोशनल कार्ड खेला, वहीं प्रशांत किशोर पूरी तरह से शिक्षा, रोजगार और बुनियादी मुद्दों पर केंद्रित रहे। उन्होंने मोहल्ला मीटिंग और जन-संवाद के जरिए भाजपा के सोशल इंजीनियरिंग को ध्वस्त कर दिया। इसके अलावा, भाजपा की स्थानीय इकाई में चल रही अंदरूनी कलह का फायदा उठाने में भी पीके कामयाब रहे।

नतीजों का संदेश बांकीपुर की यह जीत महज एक सीट की जीत नहीं है, बल्कि बिहार में एक नए राजनीतिक विकल्प के उदय का संकेत है। प्रशांत किशोर की यह रणनीति न केवल भाजपा के लिए चिंता का विषय है, बल्कि राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी आरजेडी के लिए भी मंथन का कारण बन गई है। मतगणना जारी है, लेकिन बांकीपुर की जनता ने अपना फैसला लगभग सुना दिया है।

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