सांसद-विधायक नहीं, गांव का सरपंच बनना ही असली लक्ष्य: ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के अभिजीत दिपके का बड़ा ऐलान
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन का चेहरा बने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अब अपनी भावी राजनीति और एजेंडे को लेकर बड़ा खुलासा किया है। दिपके ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी दिलचस्पी सांसद या विधायक बनने में बिल्कुल नहीं है।

सरपंच बनकर सुधारेंगे व्यवस्था दिपके का कहना है कि वे संसद या विधानसभा की सीढ़ियां चढ़ने के बजाय महाराष्ट्र के हिंगोली स्थित अपने गांव सांतुक पिंपरी का सरपंच बनना चाहते हैं। उनका मानना है कि जमीनी स्तर पर स्कूल, सड़क और अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाओं को सुधारने के लिए सरपंच का पद सबसे प्रभावी है।

सिस्टम के खिलाफ है लड़ाई दिपके ने साफ किया कि उनकी पार्टी किसी एक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की खामियों के खिलाफ लड़ रही है। उन्होंने कहा, आज जो भी दल सत्ता में होगा, हम उसकी कमियों पर सवाल उठाएंगे। हमारा उद्देश्य राजनीति करना नहीं, बल्कि एक पब्लिक प्रेशर ग्रुप के रूप में काम करना है।

राजनीतिक दल बनाने से क्यों कतरा रहे? मौजूदा राजनीतिक हालातों पर कटाक्ष करते हुए दिपके ने कहा कि आज की पार्टियां और उनके नेता जनता का भरोसा खो चुके हैं। उन्होंने कहा, विधायक चुनकर सुबह एक पार्टी में होता है और शाम को दूसरी पार्टी का हिस्सा बन जाता है। ईडी और सीबीआई के डर से पार्टियां तोड़ी जा रही हैं। ऐसे में नई पार्टी बनाकर क्या हासिल होगा?

प्रधानमंत्री को दी चुनौती अपनी शिक्षा और विदेश यात्राओं पर उठ रहे सवालों पर दिपके ने दो टूक जवाब दिया। उन्होंने कहा, मैं अपने स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन के सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने को तैयार हूँ, लेकिन प्रधानमंत्री को भी अपनी डिग्री सार्वजनिक करनी चाहिए। अगर सरकार मेरे घर ईडी या सीबीआई भेज रही है, तो उनके साथ पीएम की डिग्री भी भेजे।

CJP का अगला कदम आंदोलन की दिशा तय करने के लिए 5 अगस्त को दिपके ने अपने आवास पर एक अहम बैठक बुलाई है। उन्होंने बताया कि उनकी टीम, जो पहले महज 10-20 लोगों की थी, अब 300 से अधिक स्वयंसेवकों तक पहुंच गई है। इस बैठक में संगठन की भविष्य की रूपरेखा और प्रमुख मुद्दों पर सामूहिक निर्णय लिया जाएगा।

दिपके ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें अन्ना हजारे या गांधी जैसे संबोधनों से तुलना करना पसंद नहीं है। वे अपनी स्वतंत्र पहचान के साथ ही देश की शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखना चाहते हैं।

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