रणजी ट्रॉफी: आखिर अपने ही राज्य को क्यों छोड़ रहे हैं क्रिकेटर? जानिए इसके पीछे के नियम और अनकहे कारण
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भारतीय घरेलू क्रिकेट की नींव रणजी ट्रॉफी है। यहीं से निकलकर सितारे टीम इंडिया का सपना पूरा करते हैं। लेकिन हाल ही में पंजाब किंग्स के स्टार बल्लेबाज शशांक सिंह के छत्तीसगढ़ छोड़कर पुडुचेरी जाने के फैसले ने एक नई बहस छेड़ दी है। आखिर क्या कारण है कि खिलाड़ी अपने घरेलू राज्य की टीम को छोड़ने पर मजबूर हो जाते हैं?

शशांक सिंह का बड़ा फैसला: क्या है मामला?

शशांक सिंह ने खुद पुष्टि की है कि वह 2026-27 सीजन से पुडुचेरी की ओर से खेलेंगे। उन्होंने अपने राज्य संघ (CSCS) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। खिलाड़ी के अनुसार, चोटिल होने के दौरान बोर्ड ने उनका समर्थन नहीं किया और उन्हें छत्तीसगढ़ प्रीमियर लीग या प्री-सीजन कैंप तक में शामिल नहीं किया गया। उचित जवाब न मिलने पर उन्होंने यह कड़ा कदम उठाया।

खिलाड़ी क्यों बदलते हैं अपनी घरेलू टीम?

खिलाड़ियों के लिए टीम छोड़ना कोई शौक नहीं, बल्कि एक मजबूरी या करियर का बड़ा दांव होता है। इसके पीछे मुख्य कारण ये हैं:

क्या टीम बदलना आसान है? बीसीसीआई के सख्त नियम

कोई खिलाड़ी रातों-रात टीम नहीं बदल सकता। इसके लिए बीसीसीआई की एक व्यवस्थित प्रक्रिया है:

  1. एनओसी (NOC): खिलाड़ी को अपने पुराने राज्य संघ से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है।
  2. नई स्वीकृति: जिस राज्य की टीम में खिलाड़ी शामिल होना चाहता है, उस संघ की सहमति भी जरूरी है।
  3. बीसीसीआई पात्रता: बीसीसीआई के नियमों के अनुसार, खिलाड़ी बीच सीजन में टीम नहीं बदल सकते। एक समय पर खिलाड़ी केवल एक ही राज्य संघ के साथ पंजीकृत रह सकता है।

इतिहास गवाह है: इन दिग्गजों ने भी बदली राह

सिर्फ शशांक सिंह ही नहीं, बल्कि कई बड़े नामों ने अपने करियर के दौरान टीम बदली है। रॉबिन उथप्पा (कर्नाटक से सौराष्ट्र और केरल), वसीम जाफर (मुंबई से विदर्भ), अर्जुन तेंदुलकर (मुंबई से गोवा) और पृथ्वी शॉ (मुंबई से महाराष्ट्र) जैसे खिलाड़ी इस फेहरिस्त में शामिल हैं।

स्पष्ट है कि घरेलू क्रिकेट में अब खिलाड़ी अपने करियर को प्राथमिकता दे रहे हैं। यदि राज्य संघ उन्हें सही माहौल नहीं दे पाते, तो खिलाड़ी नई राह तलाशने में हिचकिचा नहीं रहे हैं।

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