लगातार चोटिल हो रहे खिलाड़ी: क्या फेल हो गया है BCCI का मेडिकल सिस्टम?
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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के गलियारों में इन दिनों हलचल तेज है। टीम इंडिया के प्रमुख खिलाड़ियों का लगातार चोटिल होकर टीम से बाहर होना बोर्ड के लिए सिरदर्द बन गया है। अब बीसीसीआई ने इस समस्या से निपटने के लिए सख्त रुख अपनाते हुए पूरे मेडिकल सिस्टम की समीक्षा करने का फैसला किया है।

फिजियो और मेडिकल टीम पर लटकी तलवार खिलाड़ियों की बढ़ती चोटों के बीच बीसीसीआई अब हैंड्स-ऑन मोड में आ गया है। बोर्ड टीम के मुख्य फिजियो कमलेश जैन के कामकाज की विस्तृत जांच करने की तैयारी में है। जैन ने 2022 में नितिन पटेल की जगह यह पद संभाला था, लेकिन हालिया प्रदर्शन ने बोर्ड को उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने के लिए मजबूर कर दिया है। बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) भी अब बीसीसीआई की सीधी निगरानी में होगा।

टीम कॉम्बिनेशन को लेकर परेशान हैं गंभीर और गिल कप्तान शुभमन गिल और मुख्य कोच गौतम गंभीर की नाराजगी का बड़ा कारण टीम सिलेक्शन में आ रही बाधा है। जसप्रीत बुमराह, हर्षित राणा, नीतिश कुमार रेड्डी और वॉशिंगटन सुंदर जैसे प्रमुख खिलाड़ियों की अनुपलब्धता ने कोच और कप्तान की रणनीति को बिगाड़ दिया है। कई मुकाबलों में अपनी पहली पसंद की प्लेइंग इलेवन न उतार पाना टीम के प्रदर्शन को प्रभावित कर रहा है।

बोर्ड के डॉक्टरों से भरोसा उठने का संकेत? एक चिंताजनक पहलू यह भी सामने आया है कि कई बड़े खिलाड़ी बीसीसीआई के मेडिकल प्रोटोकॉल के बजाय बाहर के डॉक्टरों और एक्सपर्ट्स पर ज्यादा भरोसा दिखा रहे हैं। यदि खिलाड़ी खुद की रिकवरी के लिए बोर्ड के सिस्टम पर निर्भर नहीं हैं, तो यह सीधे तौर पर बीसीसीआई के मेडिकल विभाग की विफलता को दर्शाता है।

ट्रेनिंग और वर्कलोड मैनेजमेंट पर उठे सवाल बीसीसीआई के स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग विभाग में हुए बदलाव भी चर्चा में हैं। सोहम देसाई की जगह एड्रियन ले रॉक्स के आने के बाद ट्रेनिंग के तरीकों में आए बदलावों से कुछ खिलाड़ी सहज नहीं हैं। खिलाड़ियों के चोटिल होने के पीछे वर्कलोड मैनेजमेंट में कमी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की कमी को बड़ी वजह माना जा रहा है।

अब जवाबदेही तय करने की बारी बीसीसीआई अब केवल सतही बदलावों तक सीमित नहीं रहना चाहता। बोर्ड का लक्ष्य यह समझना है कि आखिर कहां चूक हो रही है। इस समीक्षा के दायरे में फिटनेस मॉनिटरिंग, रिहैबिलिटेशन प्रक्रिया और भविष्य की कार्ययोजना शामिल होगी। बीसीसीआई का स्पष्ट संदेश है—खिलाड़ियों का बेवजह चोटिल होना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। देखने वाली बात होगी कि इस समीक्षा के बाद टीम इंडिया की फिटनेस को लेकर कौन से बड़े और कड़े फैसले लिए जाते हैं।

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