भारतीय फुटबॉल के लिए बड़ा झटका: जमशेदपुर एफसी के हटने पर सुनील छेत्री का छलका दर्द
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भारतीय फुटबॉल जगत के लिए एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) की पूर्व चैंपियन जमशेदपुर एफसी ने आगामी सत्र से हटने का बड़ा फैसला लिया है। इस निर्णय ने न केवल प्रशंसकों को निराश किया है, बल्कि भारतीय फुटबॉल के दिग्गज सुनील छेत्री ने भी अपनी गहरी चिंता जाहिर की है।

क्लब का अचानक लिया गया फैसला जमशेदपुर एफसी ने 31 जुलाई को घोषणा की कि वह 2026-27 सत्र से लीग का हिस्सा नहीं रहेगी। क्लब ने निर्धारित समयसीमा के भीतर भागीदारी शुल्क जमा नहीं किया, जिसके बाद यह कदम उठाया गया। अब चार सितंबर से शुरू होने वाले आगामी सत्र में कुल 13 टीमें ही मैदान पर उतरेंगी।

छेत्री का भावुक संदेश सुनील छेत्री ने सोशल मीडिया पर अपने दर्द को साझा करते हुए इसे दिल पर जोरदार चोट बताया। उन्होंने कहा, खिलाड़ी और स्टाफ क्लब विहीन हो जाएंगे। लीग एक टीम कम के साथ आगे बढ़ जाएगी, लेकिन भारतीय फुटबॉल में टाटा समूह का न होना एक ऐसी त्रासदी है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती।

टाटा समूह से पुनर्विचार की अपील छेत्री ने टाटा समूह से अपने फैसले पर फिर से सोचने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा, मैं समझता हूं कि बोर्डरूम में व्यावसायिक फैसले लिए जाते हैं, लेकिन टाटा समूह भारतीय फुटबॉल का एक मजबूत स्तंभ है। मेरी अपील है कि वे इस बार दिमाग से ज्यादा दिल की सुनें। भारतीय फुटबॉल को इस वक्त आपकी सबसे ज्यादा जरूरत है।

क्या है पीछे की असली वजह? सूत्रों के अनुसार, इस फैसले के पीछे अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) का एक निर्देश बड़ी वजह है। क्लबों को 1.10 करोड़ रुपये का प्रशासनिक शुल्क दो किस्तों में जमा करने का आदेश दिया गया था। इसके बाद ही क्लब ने सीनियर टीम का संचालन बंद करने का फैसला लिया।

जमीनी स्तर पर काम जारी रहेगा हालांकि, क्लब की संचालक कंपनी जमशेदपुर फुटबॉल एंड स्पोर्टिंग प्राइवेट लिमिटेड ने स्पष्ट किया है कि वे जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को खोजने और फुटबॉल के विकास के लिए अपना काम जारी रखेंगे। टाटा फुटबॉल अकादमी (टीएफए) के जरिए समूह का योगदान हमेशा से भारतीय खेल के लिए प्रेरणा रहा है, जिसे छेत्री ने भी सराहा।

अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या टाटा समूह अपनी इस दिग्गज टीम को बचाने के लिए कोई कदम उठाएगा या भारतीय फुटबॉल को वाकई अपने एक बड़े स्तंभ से हाथ धोना पड़ेगा।

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