मैं खीरा-ककड़ी नहीं हूं जो कोई काट देगा : पप्पू यादव का दिल्ली पहुंचने का खुला चैलेंज, राम मंदिर ट्रस्ट पर दागे सवाल
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पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने सनातन, भगवा और राम मंदिर ट्रस्ट पर दिए अपने ताजा बयानों से सियासी पारा चढ़ा दिया है। वाराणसी में राहुल गांधी और पप्पू यादव समेत कई नेताओं पर दर्ज एफआईआर के बाद उन्होंने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें किसी की धमकियों से डर नहीं लगता।

भगवा क्या किसी की जागीर है?

प्रेस कॉन्फ्रेंस में पप्पू यादव ने भगवा रंग को लेकर छिड़ी बहस पर दो टूक कहा कि उन्हें भी गेरुआ वस्त्र पहनने का उतना ही अधिकार है जितना किसी और को। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भगवा पहनना केवल एक विचारधारा की जागीर है? उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सनातन की रक्षा के लिए भगवा धारण कर रहे हैं, न कि चंदे में गड़बड़ी करने के लिए।

राम मंदिर ट्रस्ट पर 305 करोड़ का आरोप

पप्पू यादव ने राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों, विशेषकर चंपत राय पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कथित तौर पर 305 करोड़ रुपये के चंदे में हुई गड़बड़ी की न्यायिक जांच की मांग की है। सांसद ने मांग की है कि इस मामले की जांच हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के किसी जज की निगरानी में हो और पूरे प्रकरण का सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक किया जाए।

देख लेंगे जो करना है , दिल्ली रवाना

पप्पू यादव ने उन लोगों को खुला चैलेंज दिया है जो उन्हें धमकियां दे रहे हैं। उन्होंने कहा, मैं खीरा-ककड़ी नहीं हूं कि कोई मुझे कतर देगा या मारने की सुपारी दे देगा। उन्होंने एलान किया कि वे शाम 5 बजे दिल्ली पहुंच रहे हैं, जिसे जो करना है वह सामने आकर करे। उन्होंने कहा कि सनातन की रक्षा के लिए अगर सौ बार भी मरना पड़े, तो वे तैयार हैं।

वाराणसी में एफआईआर से गरमाया मामला

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब संसद परिसर में राम मंदिर चंदा मामले को लेकर विपक्षी नेताओं ने एक नाट्य प्रदर्शन किया था। इसके बाद वाराणसी के कोतवाली थाने में राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद समेत अन्य नेताओं पर एफआईआर दर्ज की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस प्रदर्शन से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है।

संतों की नाराजगी और कानूनी कार्रवाई

पातालपुरी मठ के प्रमुख जगद्गुरु बालक दास सहित कई संतों ने इस प्रदर्शन को भगवा और धार्मिक प्रतीकों का अपमान बताया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। एक तरफ विपक्ष इसे अपने सवाल पूछने के अधिकार और अभिव्यक्ति की आजादी बता रहा है, तो वहीं दूसरी ओर संत समाज और विभिन्न संगठन इस पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पप्पू यादव के दिल्ली पहुंचने के बाद यह सियासी और धार्मिक विवाद क्या नया मोड़ लेता है।

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