PoK में खूनी चुनाव: मुनीर की सेना का कसाई अवतार, गोलियों की गूंज से दहला मुजफ्फराबाद
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पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) के हालात बेकाबू हो गए हैं। विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के दौरान मुजफ्फराबाद में पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स ने प्रदर्शनकारियों पर जिस तरह की बर्बरता दिखाई है, उसने पूरे क्षेत्र को रणभूमि में बदल दिया है। सड़कों पर जली हुई गाड़ियां और बिखरे पत्थर इस बात की गवाही दे रहे हैं कि यहां चुनाव नहीं, दमन हो रहा है।

3 की मौत, 6 घायल: नाश्ते की मेज पर छाई खामोशी

मुजफ्फराबाद के प्लेट इलाके में सुरक्षा बलों की अंधाधुंध फायरिंग में कम से कम 3 लोगों की जान चली गई, जबकि आधा दर्जन से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि गोलीबारी इतनी भीषण थी कि घायलों को 45 मिनट तक मेडिकल मदद नहीं मिल सकी। एक 35 वर्षीय युवक की तो घर के अंदर नाश्ता करते समय सीने में गोली लगने से मौत हो गई।

युवाओं ने नकारा चुनाव, इंकलाब का बिगुल

पाकिस्तानी सेना की इस क्रूरता ने युवाओं को चुनाव प्रक्रिया से पूरी तरह अलग-थलग कर दिया है। अपनी जिंदगी का पहला वोट देने जा रहे युवाओं ने हिंसा के डर से मतदान का बहिष्कार कर दिया है। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है, अपनी जवानी कुर्बान करेंगे और इंकलाब लाएंगे। लोगों में पाकिस्तानी हुकूमत के खिलाफ गुस्सा इस कदर है कि अब वे आजादी की मांग खुलेआम कर रहे हैं।

बेनकाब हुआ पाकिस्तान का अमानवीय चेहरा

भारत सरकार ने PoK में जारी इस दमन चक्र की कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, पाकिस्तान अब तक 40 से अधिक निर्दोष नागरिकों की जान ले चुका है। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री द्वारा प्रदर्शनकारियों को दुश्मन करार दिया जाना, उनकी अमानवीय मानसिकता को दुनिया के सामने लाता है।

क्यों सुलग रहा है PoK?

PoK के लोग दशकों से पाकिस्तानी सेना के दमन और भेदभाव को झेल रहे हैं। मुजफ्फराबाद से लेकर मीरपुर तक जनता सड़कों पर है। आंदोलन की मुख्य वजहें केवल महंगाई, बिजली बिल और आटे की किल्लत नहीं हैं, बल्कि यह पाकिस्तानी सेना द्वारा मानवाधिकारों का लगातार हनन है।

आर्थिक मांग से आजादी की जंग तक

जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के बैनर तले शुरू हुआ यह आंदोलन अब एक बड़े राजनीतिक संघर्ष में तब्दील हो चुका है। पांच दिनों के भीतर 50 से अधिक मौतों ने यह साबित कर दिया है कि स्थानीय लोग अब पाकिस्तान के कब्जे से पूर्ण आजादी चाहते हैं। रोटी और बिजली की मांग अब मुनीर सरकार के खिलाफ एक बड़े जन-विद्रोह का रूप ले चुकी है।

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