कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 ग्लासगो में अपने समापन की ओर है। भारतीय एथलीटों ने इस बार भी शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 39 मेडल (13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज) अपने नाम किए हैं। फिलहाल भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर काबिज है। इस बीच यह जानना दिलचस्प है कि आखिर कॉमनवेल्थ खेलों में भारत का सफर कब और कैसे शुरू हुआ था।
कॉमनवेल्थ गेम्स की नींव 1930 में रखी गई थी, जिसे तब ब्रिटिश एम्पायर गेम्स के नाम से जाना जाता था। इसका पहला आयोजन हैमिल्टन, कनाडा में हुआ था। समय के साथ इन खेलों के नाम कई बार बदले गए—1954 से 1966 तक इन्हें ब्रिटिश एम्पायर एंड कॉमनवेल्थ गेम्स , 1970 से 1974 तक ब्रिटिश कॉमनवेल्थ गेम्स और अंततः 1978 से आधिकारिक तौर पर कॉमनवेल्थ गेम्स कहा जाने लगा।
भारत ने पहली बार 1934 के लंदन कॉमनवेल्थ गेम्स में शिरकत की थी। इसी साल कुश्ती में राशिद अनवर ने सिल्वर मेडल जीतकर भारत के लिए पहला पदक सुनिश्चित किया। हालांकि, भारत को अपने पहले गोल्ड मेडल के लिए 24 साल का लंबा इंतजार करना पड़ा। यह सूखा 1958 में कार्डिफ गेम्स में खत्म हुआ, जब महान धावक मिल्खा सिंह ने 440 गज की दौड़ में गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया।
भारत के लिए अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन 2010 में रहा, जब दिल्ली ने इन खेलों की मेजबानी की थी। इस संस्करण में भारत ने 38 स्वर्ण, 27 रजत और 36 कांस्य पदक के साथ कुल 101 पदक जीते और पदक तालिका में दूसरा स्थान हासिल किया। यह पहली बार था जब भारत ने 100 से अधिक पदक जीतने का आंकड़ा पार किया था।
कॉमनवेल्थ गेम्स के 100 साल पूरे होने पर 2030 में होने वाले खेलों की मेजबानी भारत को मिली है। इसका आयोजन गुजरात के अहमदाबाद में होगा। यह आयोजन न केवल भारत की खेल अवसंरचना को विश्वस्तरीय पहचान देगा, बल्कि 2036 ओलंपिक की मेजबानी की भारत की महत्वाकांक्षा को भी मजबूती प्रदान करेगा।
पिछले दशकों में भारत का प्रदर्शन लगातार निखरा है। चाहे 2002 के मैनचेस्टर गेम्स हों या 2022 के बर्मिंघम गेम्स, भारतीय खिलाड़ियों ने हर बार अपनी ताकत दिखाई है। 2026 के ग्लासगो गेम्स में भी भारतीय दल का प्रदर्शन यह साबित करता है कि आने वाले समय में भारत वैश्विक खेल पटल पर और भी ऊंचाइयों को छुएगा।
“For a long time, my goal was simply to have the national anthem played, to make sure it was played for my weight category. Today, that dream finally came true.”
— The Khel India (@TheKhelIndia) August 2, 2026
“Hearing the national anthem was an incredibly emotional experience”
- Arundhati 🏅 pic.twitter.com/kBm243lBXC
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