कुलगाम में दहला आतंकियों का खौफ: छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों की हत्या, सुरक्षा पर उठे सवाल
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कुलगाम, जम्मू-कश्मीर: दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम जिले में शुक्रवार शाम हुए एक बर्बर आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। केलम इलाके में ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूरों को आतंकियों ने निशाना बनाया। इस हमले में दोनों मजदूरों की जान चली गई, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

कौन थे मृतक मजदूर?

आतंकियों की गोली का शिकार बने मजदूरों की पहचान 21 वर्षीय दीपक रात्रे और 28 वर्षीय भूपेंद्र भैना के रूप में हुई है। दीपक की मौत घटनास्थल पर ही हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल भूपेंद्र ने इलाज के दौरान शनिवार सुबह श्रीनगर के अस्पताल में दम तोड़ दिया। दोनों अपने परिवारों की आजीविका चलाने के लिए छत्तीसगढ़ से कश्मीर आए थे। दीपक अपने परिवार का इकलौता सहारा था, जिस पर अपनी मां और शारीरिक रूप से अक्षम भाई की जिम्मेदारी थी।

प्रशासन और सरकार की मदद

इस हृदयविदारक घटना पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे क्रूर आतंकी हमला बताया है। उन्होंने सुरक्षा बलों को आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन तेज करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मृतकों के परिजनों के लिए 10-10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की है। वहीं, छत्तीसगढ़ सरकार ने भी संवेदनशीलता दिखाते हुए प्रत्येक पीड़ित परिवार को 20-20 लाख रुपये की सहायता देने का ऐलान किया है।

सुरक्षा चूक पर विपक्ष के तीखे तेवर

घटना के बाद घाटी में राजनीतिक हलचल भी बढ़ गई है। नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच हुई इस चूक पर सवाल उठाते हुए इसे सुरक्षा तंत्र की विफलता करार दिया है।

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने इस घटना को पहलगाम कांड की पुनरावृत्ति बताया और इसे सुरक्षा दावों की पोल खोलने वाला करार दिया। वहीं, भाजपा नेता अल्ताफ ठाकुर ने भी इसे चिंताजनक बताते हुए खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा बलों को अपनी कार्यप्रणाली में और अधिक सतर्कता बरतने की नसीहत दी है।

दहशत का माहौल

हमले के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा बलों ने घेराबंदी कर तलाशी अभियान छेड़ दिया है। हालांकि, अब तक किसी भी चरमपंथी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। घाटी में हाल के दिनों में बढ़ीं ऐसी घटनाएं न केवल वहां काम करने वाले प्रवासी मजदूरों के मन में डर पैदा कर रही हैं, बल्कि पर्यटकों और स्थानीय लोगों के बीच भी असुरक्षा की भावना को बढ़ा रही हैं। मृतक मजदूरों का अंतिम संस्कार कश्मीर में ही कर दिया गया है।

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