मदरसे जिहादी फैक्ट्रियां हैं : तसलीमा नसरीन का बड़ा हमला, बांग्लादेश की स्थिति पर जताई गहरी चिंता
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बांग्लादेश की चर्चित लेखिका तसलीमा नसरीन ने एक बार फिर कट्टरपंथियों पर तीखा प्रहार किया है। कोलकाता में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बांग्लादेश में मदरसों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन्हें जिहादी फैक्ट्री करार दिया है।

मदरसों को बंद करने की मांग तसलीमा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश को मदरसा शिक्षा की कोई आवश्यकता नहीं है। उनके अनुसार, कई मदरसों से पढ़े लोग सीधे तौर पर जिहादी गतिविधियों में लिप्त पाए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि मदरसों के कई शिक्षक और इमाम पहले भी कट्टरपंथ के मामलों में गिरफ्तार हो चुके हैं। वे मानते हैं कि ये संस्थान रोजगार पैदा करने के बजाय दान पर पलने वाले छात्रों की फौज तैयार कर रहे हैं।

धर्म और राजनीति को अलग करें लेखिका ने मांग की कि बांग्लादेश को पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष बनाया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार और धर्म का अलग रहना ही देश की प्रगति का एकमात्र रास्ता है। उन्होंने चेतावनी दी कि कई मस्जिदें कट्टरपंथी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन चुकी हैं, इसलिए उन पर कड़ी निगरानी बेहद जरूरी है।

हिंदुओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि मोहम्मद यूनुस के शासनकाल में हिंदुओं पर अत्याचार की घटनाएं बढ़ी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने में विफल रही है। नसरीन ने दावा किया कि मदरसों में गैर-मुसलमानों के खिलाफ नफरत का पाठ पढ़ाया जा रहा है, जिसका खामियाजा हिंदू, बौद्ध और ईसाई समुदायों को हिंसा और भेदभाव के रूप में भुगतना पड़ रहा है।

अस्थिर राजनीति और जमात का प्रभाव तसलीमा ने बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव को देश के भविष्य के लिए घातक बताया। उन्होंने कहा कि देश में कट्टरपंथी ताकतों का दबदबा लगातार बढ़ रहा है। वे मानती हैं कि आधुनिक शिक्षा ही एकमात्र सहारा है। उन्होंने सलाह दी कि सरकार को मंदिर या मदरसे बनाने के बजाय ऐसे स्कूल खोलने चाहिए जहाँ सभी नागरिकों को समान अवसर मिल सकें।

महिला अधिकारों पर पुरानी मांग समान नागरिक संहिता (UCC) के मुद्दे पर तसलीमा ने अपनी दशकों पुरानी मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि धर्म पर आधारित निजी कानून महिलाओं के साथ सरासर भेदभाव करते हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि बांग्लादेश में हिंदू बेटियों को पिता की संपत्ति में बराबर का हक नहीं मिलता और महिलाओं के लिए तलाक जैसी प्रक्रियाएं भी बेहद कठिन हैं।

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