प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रदर्शनकारी युवाओं को माफ करने की अपील के बाद देश की राजनीति गरमा गई है। विपक्षी दलों ने इसे मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने की साजिश करार दिया है।
राहुल गांधी का तीखा प्रहार लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि भारत के छात्रों को प्रधानमंत्री की क्षमा की जरूरत नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री को खुद छात्रों से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पेपर लीक और रद्द होती परीक्षाओं ने लाखों युवाओं के सपने छीन लिए हैं।
बेईमान तंत्र और टूटे सपनों का सवाल राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि एक तरफ भ्रष्ट और बेईमान शिक्षा व्यवस्था है, वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री छात्रों को माफ करने की बात कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पीएम ने एक भी ऐसे शोकाकुल परिवार से मुलाकात की, जिसने अपने बच्चे को खोया है या जिसके सपने पेपर लीक की भेंट चढ़ गए?
विपक्ष का हमला: ध्यान भटकाने की कोशिश विपक्षी नेताओं ने इसे पूरी तरह से रेटोरिक करार दिया है। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि गाली, माफी और रील का यह खेल असल मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए है। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से प्रदर्शनकारियों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई का जवाब मांगा।
संजय सिंह और मनोज झा की प्रतिक्रिया आप सांसद संजय सिंह ने तंज कसा कि प्रधानमंत्री को अपशब्दों पर अब याद आई है, जबकि उनकी अपनी पार्टी के लोग लंबे समय से दूसरों के प्रति अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते रहे हैं। वहीं, आरजेडी सांसद मनोज झा ने पूछा कि क्या इस माफी का मतलब छात्रों पर दर्ज एफआईआर और गिरफ्तारियों की वापसी है?
क्या है पूरा मामला? शुक्रवार देर रात एक वीडियो संदेश में पीएम मोदी ने कहा था कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान उनके और उनकी स्वर्गीय मां के लिए भद्दी गालियों का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, उन्होंने कहा कि वे इन गुमराह बच्चों को माफ करते हैं और यह उन्हें सही राह दिखाने का समय है।
छात्र संगठनों का विरोध वामपंथी छात्र संगठन आइसा ने प्रधानमंत्री के संदेश को अधूरा बताया। उनका कहना है कि पीएम ने छात्रों की भाषा पर तो बात की, लेकिन सरकार और पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर किए गए लाठीचार्ज, दमन और उन पर हो रहे डिजिटल उत्पीड़न पर एक शब्द नहीं बोला।
Nothing is more painful than seeing a parent grieve their child.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) August 1, 2026
Behind every young life lost is a family carrying pain that will never leave them - and serious questions about a broken education system.
Leaked papers. Cancelled exams. Years of preparation destroyed overnight.… pic.twitter.com/nzQE61zP14
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