E20 पेट्रोल पर केजरीवाल का बड़ा हमला: सस्ता करो या विकल्प दो , टाउनहॉल में सरकार से पूछे तीखे सवाल
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दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में शुक्रवार को E20 फ्यूल के खिलाफ एक बड़ा नेशनल टाउनहॉल आयोजित किया गया। आम आदमी पार्टी (AAP) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर के विशेषज्ञ, मोटर मैकेनिक और प्रभावित वाहन मालिकों ने हिस्सा लिया। दावा है कि इस कार्यक्रम से 6 लाख से अधिक लोग जुड़े।

केजरीवाल की सरकार से 3 प्रमुख मांगें

टाउनहॉल में चर्चा के बाद अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार के सामने तीन स्पष्ट मांगें रखीं:

  1. विकल्प की स्वतंत्रता: पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों को चुनाव करने का हक हो। जो शुद्ध पेट्रोल खरीदना चाहे उसे वह मिले और जो E20 चुनना चाहे, उसे वह विकल्प दिया जाए।
  2. सस्ता हो E20: E20 ईंधन की कीमत शुद्ध पेट्रोल से कम होनी चाहिए।
  3. पेट्रोल के दाम घटाएं: केजरीवाल का दावा है कि ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें गिरने के बावजूद पेट्रोल महंगा है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल की खुदरा कीमत 84 रुपये प्रति लीटर से कम होनी चाहिए।

इथेनॉल से आम आदमी को सिर्फ नुकसान

केजरीवाल ने E20 को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि इससे न तो किसानों को फायदा हो रहा है और न ही विदेशी मुद्रा की बचत। उन्होंने आरोप लगाया कि इथेनॉल प्लांट के कारण भूजल प्रदूषित हो रहा है और यह ईंधन गाड़ियों का माइलेज घटाकर इंजन को भी नुकसान पहुंचा रहा है। केजरीवाल ने तंज कसते हुए कहा, आखिर सरकार किसके दबाव में जनता पर यह ईंधन थोप रही है?

मैकेनिकों ने दिखाए तकनीकी सबूत

कार्यक्रम में 12 साल से काम कर रहे मोटर मैकेनिक आमिर खान ने लाइव डेमोंस्ट्रेशन के जरिए बताया कि कैसे E20 के इस्तेमाल से फ्यूल पंप चोक हो रहे हैं और इंजन फेल हो रहे हैं। इस दौरान बिहार के चर्चित यूट्यूबर मनीष कश्यप और पीएम मोदी की मिमिक्री करने वाले श्याम रंगीला भी मौजूद रहे, जिन्होंने आम लोगों की परेशानी को साझा किया।

मामला शांत होते ही E25 और E30 लाएगी सरकार

केजरीवाल ने आशंका जताई कि सरकार जनआक्रोश के शांत होने का इंतजार कर रही है। उन्होंने कहा, सरकार अभी कह रही है कि E25 या E30 पर स्टडी चल रही है, लेकिन हकीकत में वे केवल चुप बैठने का मौका ढूंढ रहे हैं। एक बार मामला ठंडा पड़ा, तो वे धीरे-धीरे E25, E30 और E40 तक थोप देंगे।

सरकार के पास कोई ठोस स्टडी नहीं

AAP प्रमुख ने आरोप लगाया कि E20 लागू करने से पहले कोई वैज्ञानिक अध्ययन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग मंत्रालय इसके प्रभाव को लेकर अलग-अलग आंकड़े दे रहे हैं, जो साबित करता है कि यह फैसला बिना किसी ठोस तैयारी के जनता पर थोपा गया है। उन्होंने सरकार को चुनौती दी कि वे इन सबूतों को देखें जिन्हें टाउनहॉल में जनता के सामने रखा गया है।

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