भरत तिवारी एनकाउंटर: STF जवान की गिरफ्तारी पर DGP का बड़ा बयान, बोले- सबूतों के आधार पर होगी अगली कार्रवाई
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भोजपुर के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर केस में बिहार पुलिस की कार्रवाई तेज हो गई है। STF जवान अक्षय कुमार की गिरफ्तारी के बाद बिहार के DGP विनय कुमार ने स्पष्ट कर दिया है कि पुलिस की कार्रवाई पूरी तरह से साक्ष्यों पर आधारित है।

साक्ष्यों के आधार पर हुई कार्रवाई DGP विनय कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अक्षय कुमार की गिरफ्तारी ठोस एविडेंस मिलने के बाद की गई है। उन्होंने साफ किया कि मामले की न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) चल रही है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी और नए तथ्य सामने आएंगे, कानून के दायरे में रहकर और भी गिरफ्तारियां की जाएंगी।

परिवार का आरोप: और भी हैं दोषी मृतक भरत भूषण तिवारी के परिजनों ने इस गिरफ्तारी को न्याय की ओर पहला कदम बताया है। उनकी मां आशा देवी ने आरोप लगाया है कि गोलीबारी की शुरुआत अक्षय कुमार ने की थी, लेकिन इसमें तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा, थानाध्यक्ष राजेश मालाकार और तत्कालीन एसडीओ संजीत कुमार की भी अहम भूमिका थी। परिजनों ने मांग की है कि घटना में शामिल सभी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री पर जताया भरोसा भरत तिवारी के पिता काशी तिवारी ने सरकार और मुख्यमंत्री के प्रति अपना भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने दोषियों पर कार्रवाई का जो आश्वासन दिया था, उस पर सरकार सकारात्मक कदम उठा रही है। परिवार को उम्मीद है कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

27 अगस्त तक साक्ष्य पेश करने की अपील फिलहाल, इस पूरे मामले की जांच सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता वाला न्यायिक जांच आयोग कर रहा है। आयोग ने आम जनता, प्रत्यक्षदर्शियों और संगठनों से घटना से जुड़े वीडियो, ऑडियो या अन्य दस्तावेज मांगे हैं।

साक्ष्य जमा करने के लिए 27 अगस्त की समय सीमा तय की गई है। आयोग यह सुनिश्चित करेगा कि 17 जून को शाहपुर के बिलौटी गांव में हुई पुलिस कार्रवाई के हर पहलू और उसके औचित्य की बारीकी से जांच हो सके।

आरा में बुनियादी सुविधाओं पर उठे सवाल इस बीच, स्थानीय स्तर पर प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आरा में 31.74 लाख रुपये की लागत से बनी वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट बंद पड़ी है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी धन की बर्बादी और प्रशासनिक लापरवाही आम हो गई है, जिसकी जांच भी जरूरी है।

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