स्यूटा संकट: मोरक्को से समुद्र पार कर यूरोप में घुसपैठ, क्या स्पेन के लिए बढ़ रही है मुश्किलें?
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स्पेन के उत्तरी अफ्रीकी एन्क्लेव स्यूटा में पिछले एक सप्ताह से प्रवासियों की भारी भीड़ उमड़ रही है। समुद्र के रास्ते और बाड़ फांदकर यूरोपीय सीमा में दाखिल होने वाले लोगों के कारण प्रशासन पर भारी दबाव है। यह स्थिति अब एक बड़े भू-राजनीतिक और मानवीय संकट में बदलती जा रही है।

स्यूटा: यूरोप का प्रवेश द्वार क्यों बना? स्यूटा स्पेन का वह छोटा सा क्षेत्र है जो अफ्रीका के उत्तर में स्थित है और सीधे मोरक्को से अपनी सीमा साझा करता है। यह यूरोपीय संघ और अफ्रीकी महाद्वीप के बीच एकलौता स्थलीय भूमि मार्ग है। बेहतर जीवन और रोजगार की तलाश में अफ्रीका और मध्य पूर्व के हजारों लोग इसे यूरोप में दाखिल होने का सबसे छोटा लेकिन सबसे खतरनाक रास्ता मानते हैं।

अचानक इतनी बड़ी संख्या में क्यों पहुंच रहे हैं प्रवासी? इस संकट के पीछे एक कानूनी पेंच है। हाल ही में एक अदालत ने फैसला सुनाया था कि स्यूटा या मेलिला पहुंचने वाले प्रवासियों को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के तुरंत वापस नहीं भेजा जा सकता।

मानव तस्करी गिरोहों ने इसी फैसले का फायदा उठाया है। तस्कर प्रवासियों को यह भरोसा दिला रहे हैं कि एक बार स्यूटा की जमीन पर कदम रखते ही उन्हें सुरक्षित मान लिया जाएगा और तुरंत डिपोर्ट नहीं किया जाएगा। इसी गलत जानकारी के चलते प्रवासियों की बाढ़ सी आ गई है।

प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव स्यूटा का स्थानीय प्रशासन अब ढहने की कगार पर है। विशेष रूप से बिना अभिभावक वाले नाबालिगों के लिए बने केंद्रों की क्षमता पूरी तरह खत्म हो चुकी है। भोजन, आवास और स्वास्थ्य सेवाओं का भारी अभाव हो गया है। इसके अलावा, समुद्र में जान जोखिम में डालने वाले प्रवासियों के शवों का मिलना प्रशासन के लिए एक बड़ी मानवीय चुनौती बन गया है।

यूरोप में छिड़ी राजनीतिक बहस इस घुसपैठ ने पूरे यूरोप को चौंका दिया है। इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने इसे यूरोप की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा करार दिया है। मेलोनी ने स्पेन को शेंगेन क्षेत्र से अस्थायी रूप से निलंबित करने की मांग तक कर दी है, जिससे यूरोपीय संघ के भीतर एक नई राजनीतिक खींचतान शुरू हो गई है।

क्या 2021 जैसा बड़ा संकट दोहराएगा? मई 2021 में करीब 8,000 प्रवासियों ने एक साथ स्यूटा की सीमा पार की थी, जिससे स्पेन और मोरक्को के बीच कूटनीतिक रिश्ते काफी बिगड़ गए थे। मौजूदा हालात उसी त्रासदी की याद दिला रहे हैं। स्पेन सरकार अब मोरक्को के साथ मिलकर सीमा पर कड़ी निगरानी और कूटनीतिक बातचीत के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है, लेकिन प्रवासियों का यह सैलाब यूरोप की आंतरिक सुरक्षा नीति पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।

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