मोरक्को में क्यों मचा महा-पलायन ? स्पेन के इस शहर ने खोल दिए अवैध प्रवासियों के लिए दरवाजे
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अफ्रीका के बीच बसा यूरोप का शहर आमतौर पर प्रवासियों के लिए यूरोप पहुंचने का रास्ता स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर माना जाता है, लेकिन इस बार कहानी कुछ और है। स्पेन का शहर सियुटा (Ceuta) इन दिनों चर्चा का केंद्र बना है। यह शहर भौगोलिक रूप से अफ्रीका महाद्वीप में स्थित है और इसकी जमीनी सीमा सीधे मोरक्को से जुड़ी है। गुरुवार को एक ही दिन में लगभग 49,000 लोग सीमा पार कर सियुटा पहुंच गए, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई।

बेरोजगारी और एक अदालती फैसले ने बिगाड़े हालात मोरक्को से आने वालों में युवाओं की संख्या सबसे अधिक है, जो लंबे समय से बेरोजगारी से जूझ रहे हैं। इसी बीच, स्पेन के सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला सुनाया कि समुद्र में पकड़े गए प्रवासियों को तुरंत मोरक्को वापस नहीं भेजा जा सकता; पहले उन्हें स्पेन ले जाकर कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। मानव तस्करों ने इस फैसले का गलत फायदा उठाया और यह अफवाह फैला दी कि अब स्पेन में प्रवेश आसान है, जिसके बाद भीड़ अनियंत्रित हो गई।

क्या यह एक राजनीतिक चाल है? सुरक्षा विश्लेषक इस घटना को केवल आर्थिक पलायन नहीं मान रहे हैं। कई जानकारों का मानना है कि इसके पीछे जियोपॉलिटिक्स है। यह संकट उस समय बढ़ा है जब स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने मोरक्को के क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी देश अल्जीरिया का दौरा किया था। आरोप है कि मोरक्को की सुरक्षा इकाइयों ने जानबूझकर कुछ बॉर्डर पॉइंट्स पर निगरानी ढीली कर दी थी, जिसे स्पेन के लिए एक राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

इतिहास और सियुटा का महत्व सियुटा का इतिहास 600 साल से भी अधिक पुराना है। 1668 की लिस्बन संधि के बाद से यह स्पेन के नियंत्रण में है, जबकि यह मोरक्को के तट पर स्थित है। यह यूरोपीय संघ में प्रवेश का सबसे संवेदनशील रास्ता माना जाता है। यहाँ होने वाली हर हलचल सीधे पूरे यूरोप की प्रवासन नीति (Migration Policy) को प्रभावित करती है।

स्पेन की सख्ती और आगे की स्थिति हालात इतने बिगड़े कि स्पेन को मजबूरन सेना बुलानी पड़ी। इस भगदड़ में कम से कम 18 लोगों की मौत की खबर है। स्पेन ने सियुटा में अतिरिक्त सैनिक, नौसैनिक इकाइयां और विशेष दंगा-रोधी बल तैनात कर दिए हैं। वहीं, देश में विपक्षी दलों ने सरकार की सुरक्षा नीति पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। फिलहाल के लिए, सियुटा का यह संकट यूरोप के लिए एक बड़ी सुरक्षा चुनौती बन गया है।

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